आजादी की पहल है ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ जानें इसके रोचक तथ्य
हम सभी भारतीयों के लिए अपने देश के ऐतिहासिक दिनों का बेहद महत्व है। इन्ही ऐतिहासिक दिनों की वजह से आज हम अपने देश में सुकून की सांस ले पा रहे है।
- Written By: वैष्णवी वंजारी
नई दिल्ली : हमारे देश को आजादी दिलाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण घटनाये हुई है और इन्ही में से एक ‘ भारत छोड़ों आंदोलन’ है। 9 अगस्त यानी की आज इस आंदोलन को 78 वर्ष पूर्ण हो गए है। इस अवसर पर आपको आजादी से जुड़े इस महत्वपूर्ण ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की पूरी कहानी बताने जा रहे है जिसे पढ़कर आप भी भारतीय होने पर और ज्यादा गर्व महसूस करेंगे। तो चलिए जानते है इससे जुडी पूरी कहानी क्या है…..
‘भारत छोड़ो आंदोलन’ आंदोलन की शुरुवात
आपको बता दें कि 8 अगस्त 1942 का वह दिन हम सबके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यही वो दिन है जब हमने अंग्रेजो का विरोध करना शुरू किया था। हमारे देश के आजादी के लिए बेहद अहम था और है। 8 अगस्त 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ही ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत की गई थी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारत मां को अंग्रेजों से आजाद करना था। यह आंदोलन दश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया था। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के मुंबई अधिवेशन में बापू ने इस आंदोलन शुरुआत की थी।
गांधी जी का संदेश ‘करो या मरो’
आंदोलन इतना तीव्र था की किसी एक नींव पर टिके रहना बेहद जरुरी था। जब तक भारत को आज़ादी नहीं मिलती तब तक इस आंदोलन के जरिये करो या मरो की भूमिका अपनाते हुए निरंतर देश की आजादी के लिए लड़ते रहन है, ऐसा संदेश बापू ने अपने समर्थकों को दिया था। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था का इस बार यह आंदोलन किसी भी तरह से बंद नहीं होगा। करो या मरो इस घोस वाक्य को ध्यान में रखते हुए आज़ादी की लड़ाई का यह महत्वपूर्ण भारत छोड़ो आंदोलन सफल हुआ।
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गांधी जी को किया था नजरबंद
आपको बता दें कि गांधी जी को अंग्रेजो ने अहमदनगर किले में नजरबंद कर रखा था। और जैसे ही इस आंदोलन की शुरुआत हुई वैसे ही 9 अगस्त 1942 को दिन निकलने के पहले ही कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी सदस्य गिरफ्तार हो चुके थे और कांग्रेस को गैरकानूनी घोषित कर दिया था। सरकार ने दिए गए आकड़ों के अनुसार इस आंदोलन में 940 लोग मारे गए थे और 1630 लोग घायल हो गए थे। जबकि 60229 लोगों ने गिरफ्तारी दी थी।
