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नई दिल्ली: भारत को आज़ादी मिलने की दास्तां बहुत बड़ी है, और इसे याद किया जाये तो देश के लाल शहिद भगत सिंह का नाम सबसे पहले आता है। उनका देश के पटरी जो प्यार था उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। देश की आजादी के लिए लड़ते हुए उन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनका देश के लिए किया गया यह योगदान हमें हमेशा याद रहेगा। आज का दिन (Shaheed Divas)हम सब देशवासियों के लिए भावुक कर देने वाला है, आज ही के दिन 23 मार्च साल 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी।
इस दिन को हमारे देश में शहीद दिवस (Shaheed Diwas) के तौर पर मनाया जाता है। आज के दिन हम इतिहास के वो पन्ने से आपको रूबरू करवां रहे है, जहां वीर भगतसिंग ने जन्म लिया था, आइए जानते है देश के लाल भगत सिंह के पुश्तैनी घर के बारे में जो आज भी पाकिस्तान में मौजूद है।
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अंग्रेजों ने फांसी देकर हमारे देश के सपूत भगत सिंह को हमसे छीन लिया, लेकिन वो आज भी सबके जहन में जिंदा हैं, और हमेशा जिंदा रहेंगे। आपको बता दें कि शहीद भगत सिंह के चाहने वाले ना केवल हमारे देश भारत में ही है बल्कि सरहद पार पाकिस्तान में भी हैं। जी हां दरअसल उनका पुश्तैनी घर आज भी पाकिस्तान में मौजूद है। इसी घर में शहीद-ए-आजम का जन्म हुआ था। यही वो घर है जहां भगत सिंह ने अपना बचपन बिताया था। ये हवेली पंजाब प्रांत के खटकड़कलां गांव में स्थित है। पुश्तैनी घर खटकड़कलां गांव फगवाड़ा-रोपड़ नेशनल हाईवे पर उपमंडल बंगा से तीन किलोमीटर दूर है।
दरअसल भगत सिंह की कई यादों को जिस घर ने संजोया है उस घर का पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग ने मरम्मत का काम किया है और इसकी देखरेख भी की जाती है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि जब देश का बंटवारा हुआ तो उनकी मां विद्यावती और पिता किशन सिंह यहीं रहने लगे थे। किशन सिंह का यहीं निधन हो गया था और भगत सिंह की मांग ने साल 1975 में दुनिया को अलविदा कह दिया। इस घर को बाद में म्यूजियम के तौर पर विकसित किया गया। इस घर में पुरानी चारपाई और एक पलंग है। एक कमरे में लकड़ी से बनी दो अलमारी हैं, जबकि खेती किसानी से जुड़ा कुछ सामान भी मौजूद है। वहीं दूसरे कमरे में खाने वाली मेज और कुछ बर्तन रखे हैं।
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आपको बता दें कि पाकिस्तान में भगत सिंह के इस पुश्तैनी घर को हेरिटेज साइट घोषित किया गया है। इसे संरक्षित करके कुछ साल पहले ही पर्यटकों के देखने के लिए खोला गया है। भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन संगठन कई साल से पाकिस्तान में भगत सिंह से जुड़ी यादों को संजोने का काम कर रहा है। जो वाकई में बेहद सराहनीय कार्य है। इस घर के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि भगत सिंह के दादा ने करीब 124 साल पहले यहां एक आम का पेड़ लगाया था, जो आज भी मौजूद है। भगतसिंह के इस घर को देखने के लिए कई लोग यहां आते है।