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क्या आपने भी महाकुंभ में लगाई डुबकी? गंगा के पानी को लेकर सरकार ने संसद में दिया ये जवाब

मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि सीपीसीबी ने 3 फरवरी को एनजीटी को अपनी प्रारंभिक निगरानी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 12 से 26 जनवरी 2025 के बीच एकत्र किए गए जल गुणवत्ता के आंकड़े शामिल हैं।

  • Written By: विकास कुमार उपाध्याय
Updated On: Mar 10, 2025 | 06:32 PM

प्रतीकात्मक तस्वीर, पोटो - सोशल मीडिया

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर गंगा के पानी को हाल ही में संपन्न महाकुंभ के दौरान स्नान के लिए उपयुक्त घोषित किया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB की एक नई रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोमवार को लोकसभा में यह बात बताई गई है। सरकार ने यह भी कहा कि उसने 2022-23, 2023-24 और 2024-25 (9 मार्च तक) में गंगा की सफाई के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को कुल 7,421 करोड़ रुपये प्रदान किए।

समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया और कांग्रेस सांसद के सुधाकरन के सवाल का लिखित जवाब दिया गया। इसमें केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, सभी निगरानी स्थानों पर पीएच, घुलित ऑक्सीजन (डीओ), जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) और फेकल कोलीफॉर्म (एफसी) के औसत मान स्नान के लिए स्वीकार्य सीमा के भीतर थे।

सीपीसीबी ने 3 फरवरी को क्या जानकारी दी

आपको जानकारी के लिए बता दें कि डीओ पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को दर्शाता है। बीओडी कार्बनिक पदार्थों को तोड़ने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन को मापता है। एफसी सीवेज का संकेतक है। ये जल गुणवत्ता के प्रमुख संकेतक हैं। सीपीसीबी ने बीते महीने 3 फरवरी की एक रिपोर्ट में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को इसकी जानकारी दी थी। इसमें कहा गया था कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में कई स्थानों पर पानी में फेकल कोलीफॉर्म का स्तर अधिक होने के कारण प्राथमिक स्नान जल गुणवत्ता मानक को पूरा नहीं किया जा सका था। हालांकि, 28 फरवरी को एनजीटी को सौंपी गई नई रिपोर्ट में सीपीसीबी ने कहा कि सांख्यिकीय विश्लेषण से पता चलता है कि महाकुंभ में पानी की गुणवत्ता स्नान के लिए उपयुक्त थी।

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सरकार ने इन रिपोर्टों का दिया हवाला

सीपीसीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सांख्यिकीय विश्लेषण इसलिए जरूरी था क्योंकि अलग-अलग तिथियों पर एक ही स्थान से और एक ही दिन अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए गए नमूनों के आंकड़ों में भिन्नता थी। इस वजह से ये नदी क्षेत्र में समग्र नदी जल गुणवत्ता को प्रतिबिंबित नहीं करते थे। बोर्ड की 28 फरवरी की यह रिपोर्ट 7 मार्च को एनजीटी की वेबसाइट पर अपलोड की गई थी। बोर्ड ने अमृत स्नान के दिनों सहित 12 जनवरी से अब तक गंगा नदी पर 5 स्थानों और यमुना नदी पर 2 स्थानों पर सप्ताह में दो बार जल गुणवत्ता की निगरानी की।

कई जगहों पर हुई जांच

कमलेश सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य के मामले में एनजीटी ने 23 दिसंबर 2024 को अहम निर्देश दिए थे। इसमें कहा गया था कि महाकुंभ के दौरान गंगा और यमुना की जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाए। भूपेंद्र यादव ने बताया कि इस आदेश पर सीपीसीबी ने संगम नोज (जहां गंगा और यमुना का संगम होता है) समेत श्रृंगवेरपुर घाट से दीहाघाट तक 7 जगहों पर सप्ताह में दो बार जल गुणवत्ता की निगरानी की। उन्होंने बताया कि निगरानी 12 जनवरी से शुरू हुई और इसमें अमृत स्नान के दिन भी शामिल थे।

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एनजीटी की रिपोर्ट में सामने आई ये बात

मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि सीपीसीबी ने 3 फरवरी को एनजीटी को अपनी प्रारंभिक निगरानी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 12 से 26 जनवरी 2025 के बीच एकत्र किए गए जल गुणवत्ता के आंकड़े शामिल हैं। रिपोर्ट में प्रयागराज में स्थापित 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और सात जियोसिंथेटिक डिवाटरिंग ट्यूब (जियो-ट्यूब) के आंकड़े भी शामिल हैं। बाद में, सीपीसीबी ने निगरानी स्थानों की संख्या बढ़ाकर 10 कर दी और 21 फरवरी से दिन में दो बार परीक्षण शुरू कर दिया। यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश जल निगम ने अपशिष्ट जल के उपचार और अनुपचारित पानी को गंगा में बहने से रोकने के लिए उन्नत ऑक्सीकरण तकनीकों का इस्तेमाल किया।

Did you also take dip in maha kumbh government gave this answer in parliament regarding water of ganges

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Published On: Mar 10, 2025 | 06:32 PM

Topics:  

  • Mahakumbh 2025
  • Uttar Pradesh
  • Uttar Pradesh News

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