Explainer: एक प्रधान के जाने से क्या बदल जाएगी पूरी शिक्षा व्यवस्था? प्रदर्शन सफल, लेकिन कहां फेल हो गई CJP!
CJP Protest: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन खत्म हो गया, लेकिन क्या इससे शिक्षा व्यवस्था बदलेगी? NTA सुधार, नए कानून और कॉकरोच जनता पार्टी के भविष्य पर बड़े सवाल कायम हैं।
- Written By: अक्षय साहू
जंतर-मंतर पर CJP का प्रोटेस्ट खत्म (AI जेनरेटेड इमेज)
Dharmendra Pradhan Resignation: जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन अब समाप्त हो चुका है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलनकारी अपने-अपने घर लौट गए हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद भी कई अहम सवाल अब भी बने हुए हैं। क्या केवल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से भारत की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार हो जाएगा? कॉकरोच जनता पार्टी का क्या होगा?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार के संकेत दे दिए थे। सरकार ने उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला कर उन्हें शिक्षा विभाग से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय में भेज दिया। उनकी जगह 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया। इसके अलावा, सरकार ने NTA के कई अधिकारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दीं।
उच्चधिकारियों पर नहीं आई आंच
शिक्षा विभाग में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को देखकर पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार इस मुद्दे को पहले की तुलना में अधिक गंभीरता से ले रही है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में कुल 124 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें 24 स्थायी अधिकारी हैं, जबकि 73 कर्मचारी संविदा के आधार पर काम करते हैं। इन संविदाकर्मियों में सलाहकार, विषय विशेषज्ञ और अन्य पेशेवर शामिल हैं।
सम्बंधित ख़बरें
छात्र आंदोलन खत्म, अब RAF के लाठीचार्ज पर होगी पड़ताल! CRPF ने शुरू किया पोस्ट-ऑपरेशन रिव्यू
पुणे में छात्रों का जश्न: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ढोल-ताशों संग मनी खुशी, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तेज प्रताप का बड़ा बयान, बोले- छात्रों ने सरकार को झुका दिया-VIDEO
क्या शाह ने दी पैलेट गन चलाने की मंजूरी? राहुल गांधी ने गृहमंत्री को लिखा खत, पुलिस कार्रवाई पर मांगी जवाबदेही
छात्रों के प्रदर्शन के बाद NTA से विनीत जोशी को हटाया गया (सोर्स- सोशल मीडिया)
सरकार ने घोषणा की कि उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला किया गया है और NTA के 47 अधिकारियों को टर्मिनेट कर दिया है। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इनमें कितने अधिकारी स्थायी नियुक्ति वाले थे और कितने संविदा पर कार्यरत थे। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि जिन 47 अधिकारियों को हटाया गया, उनमें वास्तव में किस श्रेणी के कर्मचारियों की संख्या अधिक थी।
बदलाव में लगेगा काफी समय
दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके और वर्तमान में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र मीडिया से बात करते हुए कहा कि का मानना है कि छात्रों की प्रमुख मांग, जो नीट पेपर लीक से जुड़ी थी, वह पूरी हो चुकी है। हालांकि, उनका कहना है कि असली परीक्षा अब सरकार के आगे उठाए जाने वाले कदमों की होगी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को शुरुआत मान रहे छात्र (सोर्स- सोशल मीडिया)
उन्होंने कहा, हमें यह याद रखना होगा कि नीट पेपर लीक का मुद्दा वह कारण था जिसने सभी छात्रों को एक मंच पर लाकर खड़ा किया, लेकिन यह अकेला मुद्दा नहीं है। यह सिर्फ शुरुआत है, पूरी न्याय प्रक्रिया अभी बाकी है। केवल एक मंत्री या नेता के पद से हट जाने से पूरी व्यवस्था नहीं बदल जाती। अगर ऐसा होता, तो निर्भया आंदोलन के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराध पूरी तरह खत्म हो गए होते। किसी एक पद पर बदलाव कर देने से सिस्टम नहीं बदलता। इसके लिए व्यापक सुधार और समय, दोनों की जरूरत होती है।
आगे आने वाले मंत्रियों पर रहेगा दवाब
विश्लेषकों का मानना है कि यदि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा भी देते हैं, तो इससे शिक्षा मंत्रालय या एनटीए की कार्यप्रणाली में तुरंत कोई क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद करना उचित नहीं होगा। यह भी तय नहीं माना जा सकता कि इसके बाद देश में पेपर लीक जैसी घटनाएं पूरी तरह रुक जाएंगी। हालांकि, इतना जरूर होगा कि केंद्र सरकार के अन्य मंत्रियों को यह संदेश मिलेगा कि उनकी कुर्सी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और जवाबदेही तय हो सकती है। ऐसे में यह इस्तीफा केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर जवाबदेही का संकेत भी माना जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रहलाद जोशी को बनाया गया नया शिक्षा मंत्री (सोर्स- सोशल मीडिया)
छात्र आंदोलन की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि सरकार और नए शिक्षा मंत्री व्यवस्था में ठोस सुधार करते हैं या नहीं। केवल शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति के हट जाने से पूरी व्यवस्था नहीं बदलती, क्योंकि संस्थागत ढांचा अभी भी वही है। यदि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी सुधार लागू किए गए और पुरानी गलतियां दोहराई नहीं गईं, तभी इस आंदोलन को सही मायनों में सफल कहा जा सकेगा।
पेपर लीक रोकने के लिए क्या कर रही है सरकार?
केंद्र सरकार छात्र आंदोलन के दौरान एक बड़ा फैसला करते हुए नया कानून बनाने का ऐलान किया है। इसका मकसद भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। पेपर लीक होने से लाखों छात्रों की मेहनत बेकार हो जाती है और उन्हें मानसिक तथा आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए सरकार इस समस्या पर सख्त कार्रवाई करना चाहती है।
पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून लाने जा रही सरकार (सोर्स- सोशल मीडिया)
प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक करने, प्रश्नपत्र बेचने, परीक्षा में नकल कराने और संगठित धोखाधड़ी करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 10 साल जेल की सजा और 10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, इस तरह के अपराधों की जांच तेजी से करने और दोषियों को जल्द सजा दिलाने की व्यवस्था भी की जाएगी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान
इसके अलावा सरकार ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए नए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया है। इस बात की घोषणा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर की थी। उन्होंने कहा कि इन फास्ट ट्रैक कोर्टों की मदद से पेपर लीक मामलों में फैसले जल्दी आएंगे। सरकार ने दावा किया था कि यह कोर्ट तीन महीने में फैसला सुना देगा। हालांकि भारत आए दिन होने वाले पेपर लीक के मामलों को देखते हुए यह कहना मुश्किल होगा कि फास्ट ट्रेक कोर्ट सच में उतनी ही तेजी से काम कर पाएंगे, जितनी तेजी का दावा सरकार कर रही है।
यह भी पढ़ें- शिक्षा मंत्री बनते ही एक्शन में प्रह्लाद जोशी! पहले दिन अधिकारियों संग हाई लेवल बैठक, देखें VIDEO
कॉकरोच जनता पार्टी का क्या होगा?
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक अभियान के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ यह डिजिटल दायरे से निकलकर एक जनआंदोलन बन गई। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन ने अपने आंदोलन के समाप्त होने की घोषणा की है। हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि उसका सफर यहीं खत्म नहीं हुआ है। संगठन अब देशभर में जाकर युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाएगा और अपने अभियान को नए स्वरूप में आगे बढ़ाएगा।
