

New Policy in Delhi-NCR: राजधानी दिल्ली और पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए 1 अक्टूबर से सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। अब बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) वाले किसी भी वाहन को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जाएगी। 'एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन' (CAQM) के निर्देशों के तहत यह कदम सर्दियों के मौसम से ठीक पहले बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
यह फैसला CAQM के निर्देश संख्या 101 के अंतर्गत लागू किया जा रहा है, जिसे लेकर 29 सितंबर को राजेश वर्मा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक भी की गई थी। इस नियम को पूरे एनसीआर में एक साथ कड़ाई से लागू करने के निर्देश सभी कार्यान्वयन एजेंसियों को दिए गए हैं।
पेट्रोल पंपों पर बिना पीयूसी वाले वाहनों को पकड़ने के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और एएनपीआर मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली के लगभग 500 पेट्रोल पंपों को एएनपीआर कैमरों से लैस कर सीधे 'वाहन पोर्टल' से जोड़ दिया गया है।
जब भी कोई वाहन पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाने पहुंचेगा, तो लगे कैमरे या कर्मचारी के मोबाइल में मौजूद ऐप के जरिए वाहन की नंबर प्लेट स्कैन की जाएगी। फोटो अपलोड होते ही सिस्टम तुरंत वाहन के पीयूसी डेटाबेस की जांच करेगा। यदि पीयूसी वैध नहीं पाई गई या उसकी मियाद खत्म हो चुकी होगी, तो पंप कर्मी ईंधन देने से तुरंत मना कर देगा।
नियम का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की पैनी नजर है। दिल्ली सरकार ने इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए 334 प्रवर्तन टीमें तैनात की हैं और एआई-आधारित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सक्रिय किया है। यदि कोई वाहन बिना वैध पीयूसी के पेट्रोल पंप पर आता है और उसका रिकॉर्ड सिस्टम में दर्ज हो जाता है, तो वाहन मालिक को 24 घंटे के भीतर पीयूसी बनवाना अनिवार्य होगा। यदि 24 घंटे में पीयूसी प्रमाण पत्र नहीं बनवाया जाता है, तो मोटर वाहन नियमों के तहत 10,000 रुपये तक का ऑनलाइन चालान सीधे वाहन मालिक के पास भेज दिया जाएगा।
दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, औसतन हर पेट्रोल पंप पर रोजाना 8 से 10 वाहन बिना पीयूसी के पहुंच रहे हैं, जिन्हें ईंधन देने से रोका जा रहा है। ऐसे में पेट्रोल पंप कर्मचारियों और चालकों के बीच विवाद होने की आशंका बढ़ गई है। इस विवाद से बचने के लिए प्रशासन व पुलिस ने पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त बढ़ाने की तैयारी की है।
पीयूसी बनवाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है। हालांकि, जिन वाहन चालकों का मोबाइल नंबर बदल गया है या आरसी से लिंक नहीं है, उन्हें केंद्रों पर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि नए आदेश के बाद पंपों पर स्थित पीयूसी केंद्रों पर चालकों की भीड़ बढ़ने लगी है। बड़ी संख्या में वाहन चालक मौके पर ही पीयूसी जांच कराकर नया प्रमाण पत्र ले रहे हैं और उसके बाद ही उन्हें ईंधन दिया जा रहा है।
CAQM केवल वाहनों के पीयूसी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रदूषण रोकने के लिए कई अन्य मोर्चों पर भी कार्रवाई कर रहा है। दिल्ली में BS-IV और उससे पुरानी ट्रांसपोर्ट तथा कमर्शियल गाड़ियों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई जा रही है। इसके अलावा, मियाद पूरी कर चुकी गाड़ियों को सीज कर स्क्रैप करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
आयोग ने 31 दिसंबर 2026 तक पूरे एनसीआर जिलों से डीजल ऑटो-रिक्शा को धीरे-धीरे हटाने की समयसीमा तय की है। इसके साथ ही पंजाब, हरियाणा और यूपी में धान की पराली जलाने से रोकने, सड़कों से धूल हटाने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें लगाने, कंस्ट्रक्शन साइट्स और डीजल जनरेटर सेटों के औचक निरीक्षण के कड़े निर्देश दिए गए हैं।