ऑपरेशन सिंदूर के बाद 3.25 लाख CRPF जवानों को राहत, छुट्टी का आदेश वापस लिया गया
इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय बलों की अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया। 10 मई को दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम हुआ था। तो कुछ फैसले वापस लिए जा रहे है।
- Written By: सौरभ शर्मा
सीआरपीएफ जवानों की छुट्टियों पर अब राहत की सांस (फोटो- सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: देश के भीतर और सीमाओं पर तनाव के चलते रद्द की गई सीआरपीएफ जवानों की छुट्टियों पर अब राहत की सांस ली जा सकती है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अचानक सुरक्षा हालातों में बदलाव के चलते 7 मई को छुट्टियां रद्द कर दी गई थीं। ड्यूटी पर मौजूद न रहने वाले जवानों को तुरंत वापस बुलाया गया था। अब दस मई को भारत-पाक के बीच सीजफायर के बाद हालात सामान्य होने पर यह आदेश वापस ले लिया गया है। नए आदेश के मुताबिक सभी जवान और अधिकारी अब पहले की तरह नियमानुसार छुट्टियों का लाभ ले सकेंगे।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसके बाद सुरक्षा सतर्कता के चलते जवानों की छुट्टियां ही नहीं, तबादले भी रोक दिए गए थे। जो अधिकारी सात मई तक रिलीव नहीं हुए थे, उन्हें अपनी मौजूदा तैनाती पर ही रुकने का आदेश जारी किया गया था। अब हालात सामान्य होते देख ट्रांसफर प्रक्रिया भी पहले की भांति बहाल कर दी गई है। इससे हज़ारों जवानों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
ऑपरेशन के बाद रद्द हुई थीं छुट्टियां, अब आदेश वापस
भारत द्वारा की गई एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर दबाव बना और हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने सभी अर्धसैनिक बलों की छुट्टियां रद्द कर दीं और जो भी जवान छुट्टी पर थे, उन्हें तत्काल ड्यूटी पर वापस लौटने का आदेश जारी हुआ। सीआरपीएफ समेत सभी बलों में अलर्ट जारी किया गया था। लेकिन अब 10 मई के बाद से भारत-पाक के बीच तनाव घटने और सीजफायर लागू होने के बाद गुरुवार को छुट्टियां रद्द करने वाला आदेश त्वरित प्रभाव से वापस ले लिया गया है।
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ट्रांसफर भी फिर से शुरू, जवानों को बड़ी राहत
केवल छुट्टियों पर ही नहीं, बलों में स्थानांतरण की प्रक्रिया पर भी रोक लगाई गई थी। जिन अधिकारियों को सात मई तक रिलीव नहीं किया गया था, उन्हें उन्हीं जगहों पर बने रहने का निर्देश मिला था ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में उन्हें तुरंत सक्रिय किया जा सके। अब हालात सामान्य होने के बाद यह रोक हट गई है और ट्रांसफर प्रक्रिया भी फिर से चालू हो गई है। इससे बल के आंतरिक संचालन में लचीलापन वापस आया है और जवानों को व्यक्तिगत स्तर पर राहत मिली है।
