मौत के जहरीले जाल पर ED का शिकंजा, जानलेवा सिरप बनाने वाली कंपनी के 7 ठिकानों पर छापेमारी
दर्जनों बच्चों की मौत की गुनहगार जहरीले Coldrif सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा से जुड़े ठिकानों पर ED की कार्रवाई की जा रही है। इसी जहर से मध्य प्रदेश में 20 से ज्यादा बच्चों की जान चली गई।
- Written By: सौरभ शर्मा
जहरीले सिरप को बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के खिलाफ ED की कार्रवाई (फोटो- सोशल मीडिया)
ED Raid on Coldrif Cough Syrup Company Sreesan Pharma: बच्चों की जान लेने वाले जानलेवा कोल्ड्रिफ कफ सिरप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार यानि आज ईडी की कई टीमों ने इस जहरीले सिरप को बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए चेन्नई में कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की। यह मामला मध्य प्रदेश में 20 से ज्यादा बच्चों की दर्दनाक मौत से जुड़ा है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस कार्रवाई से उन परिवारों को न्याय दिलाने के लिए उम्मीद की एक चिंगारी के रूप में समझा जा सकता है जिन्होंने इस जहर से अपने बच्चों को खोया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने यह छापेमारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की है। चेन्नई में श्रीसन फार्मा से जुड़े कुल 7 ठिकानों पर ईडी के अधिकारी जांच कर रहे हैं। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन जगहों पर छापेमारी हुई है, उनमें तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल ऑफिस के कुछ शीर्ष अधिकारियों के आवास भी शामिल हैं। इससे इस मामले में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी बढ़ गई है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है।
सरकारी तंत्र पर उठे सवाल
इस कार्रवाई ने दवा की गुणवत्ता को नियंत्रित करने वाले सरकारी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईडी की जांच का दायरा सिर्फ कंपनी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों पर भी है जिनकी जिम्मेदारी दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना थी। इस मामले में पहले ही सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक जी रंगनाथन को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनसे लगातार पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी हैं।
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न्याय की आस में परिवार
जिन परिवारों ने अपने बच्चे खोए हैं, वे हर दिन इस उम्मीद में जी रहे हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिलेगी। इस जहरीले सिरप ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं और अब सबकी निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। यह मामला सिर्फ एक कंपनी की लापरवाही का नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता का भी है, जिस पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी है। ईडी की यह कार्रवाई इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे उम्मीद है कि इस मामले की तह तक जाकर सभी दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाएगा।
