देश में गाली देना कब से अपराध हो गया? PM मोदी पर अभद्र टिप्पणी करने वाली रुचिका के बचाव में उतरे सौरव दास

Saurav Das on Ruchika Singh: रुचिका सिंह की प्रधानमंत्री पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में CJP प्रवक्ता सौरव दास ने FIR और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। जानिए उन्होंने क्या कहा और मामला क्या है।
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सौरव दास (Image- Social Media)
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Ruchika Singh Controversy: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में कार्रवाई का सामना कर रहीं रुचिका सिंह के समर्थन में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास सामने आए हैं। उन्होंने इस मामले में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी की भाषा की आलोचना की जा सकती है, लेकिन उसके लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

'आलोचना हो सकती है, लेकिन आपराधिक कार्रवाई क्यों?'

सौरव दास ने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया है तो उसकी निंदा की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे मामलों में पुलिस और आपराधिक न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "इस देश में गाली देना कब से आपराधिक अपराध बन गया? लोग सामान्य बातचीत में भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाना उचित नहीं है।"

सांसदों पर भी उठाया सवाल

सौरव दास ने अपने बयान में संसद सदस्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई जनप्रतिनिधियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन उन मामलों पर उतनी सख्ती नहीं दिखाई जाती। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति द्वारा कथित अभद्र टिप्पणी करने पर उसे विशेष रूप से निशाना बनाना उचित नहीं माना जा सकता।

'छात्रों को परेशान करना बंद किया जाए'

CJP प्रवक्ता ने सरकार और पुलिस से अपील करते हुए कहा कि आंदोलन से जुड़े छात्रों को परेशान करना बंद किया जाए। उन्होंने रुचिका सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें भी अनावश्यक रूप से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और पुलिस का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित टिप्पणी से प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा प्रभावित हुई और इससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई।

जीरो FIR दर्ज

मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना में जीरो FIR दर्ज की गई। जीरो FIR ऐसी प्राथमिकी होती है जिसे किसी भी पुलिस थाने में दर्ज किया जा सकता है, भले ही कथित घटना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हुई हो।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायत में सार्वजनिक अशांति फैलाने, शांति भंग करने के लिए उकसाने और मानहानि से संबंधित आरोपों का उल्लेख किया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

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