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CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर सुनवाई होनी है।
पार्टी ने रिहाई में देरी पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
CJP के अनुसार, उसने इस मामले में कपिल सिब्बल से सलाह ली है।
दोनों नेताओं को 12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था।
Sourav Das and Ashutosh Ranka Bail Hearing: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर आज SEM कोर्ट सुनवाई होने वाली है। इसी बीच सीजेपी ने अपने नेताओं की रिहाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। सीजेपी ने कहा कि अगर सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत से रिहा नहीं किया गया तो वह कानूनी कार्रवाई करेगी।
कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि हमने कपिल सिब्बल से सलाह ली है। अगर आशुतोष और सौरव कल रिहा नहीं होते हैं, तो हम उन सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे जिन्होंने जानबूझकर यह पक्का किया कि वे गैर-कानूनी हिरासत में रहें, खासकर तब जब उन्होंने कोई जुर्म नहीं किया है और न ही उन पर कोई आरोप है।
सीजेपी ने आगे कहा कि, सौरव और आशुतोष को सलाखों के पीछे रखने के लिए जानबूझकर देरी करने की तरकीबों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे बिना चुनौती के नहीं छोड़ा जा सकता। जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।
12 अक्टूबर को, दिल्ली पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और कई अन्य लोगों को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति के घुसने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसे एक तय विरोध प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई कर दिया गया है। पार्टी नेता अजिंक्य शिंदे ने कहा कि हिरासत में लेने के बाद, दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि हम इस कार्रवाई से डरेंगे नहीं।
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को कुछ शर्तों के साथ दिल्ली में जमानत मिल गई है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, दीपके को पीस बॉन्ड पर साइन करने के बाद रिहा कर दिया जाएगा।
इसे पहले CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने शनिवार को पार्टी के अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी की कानूनी मान्यता को चुनौती दी और स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट से उनकी तुरंत रिहाई का आदेश देने की अपील की, जिसमें मौलिक अधिकार और उचित प्रक्रिया के बड़े उल्लंघन का आरोप लगाया गया।
रत्ना सिंह एक्स पर पोस्ट में सवाल किया कि नागरिकों से शांतिपूर्ण राष्ट्रीय प्रदर्शन में भाग लेने की अपील करना कैसे अपराध माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि SEM कोर्ट को अभिजीत दीपके को रिहा कर देना चाहिए, क्योंकि उनकी गिरफ्तारी गैर-कानूनी है। उन्होंने तो बस लोगों से तिरंगा फहराने का आग्रह किया था, यह अपने आप में अपराध कैसे हो सकता है?