

CJP Online Fundraising: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को एक नए अभियान का ऐलान किया है। जंतर-मंतर पर आंदोलन खत्म होने के बाद सीजेपी अब एक नई वेबसाइट लॉन्च करने जा रही है। इस वेबसाइट के जरिए पार्टी प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं की कानूनी लड़ाई के लिए फंड जुटाएगा, जिन पर पुलिस की ओर से कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
दिल्ली में सीजेपी द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निर्दलीय राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने कहा कि यह CJP एक ऐसा सिस्टम बनाएगा जिससे यह ट्रैक किया जा सके कि किस जगह क्या हुआ, कौन सा छात्र या प्रदर्शनकारी प्रभावित हुआ और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिब्बल ने 1 करोड़ रुपये के योगदान का ऐलान किया। साथ ही पूरे देश के वकीलों और अन्य लोगों से भी इस फंड में योगदान करने का आग्रह किया, जिससे कि जहां भी कानून का दुरुपयोग हो और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जाएं, हम उनके साथ खड़े हो सकें। हमारे वकील पूरे भारत में उनका समर्थन करेंगे।
उन्होंने बताया कि यह उन वकीलों की भी पहचान करेगा जो मदद कर सकते हैं। वे एक वेबसाइट बनाएंगे जहां कानूनी मदद देने के इच्छुक वकील अपना नाम, लोकेशन और वे किस तरह की मदद दे सकते हैं, इसकी जानकारी रजिस्टर कर सकेंगे।
कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि हमें गहरा सदमा लगा है कि सरकार अपने वादों को पूरा नहीं कर रही है। हम उम्मीद करते हैं कि कल, यानी मंगलवार तक हमारी मांगों पर लिखित आश्वासन मिले। अगर सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया और FIR तुरंत वापस नहीं ली गईं, तो हम दिल्ली में एक और धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
रांका ने बताया कि 20 जुलाई को हमारी केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ यह सहमति बनी थी कि प्रदर्शनकारियों या आयोजकों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की जाएगी न सिर्फ 20 जुलाई या उससे पहले दिल्ली में हुई घटनाओं के सिलसिले में, बल्कि देश भर में चल रहे प्रदर्शनों के संबंध में भी, खासकर उन राज्यों में जहां BJP की सहयोगी सरकारें हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि हम कपिल जी के लगातार संपर्क में थे और उनसे कानूनी सलाह ली थी। जब हमने 25 तारीख को विरोध प्रदर्शन खत्म किया, तो हमें डर था कि भविष्य में, जब आंदोलन धीमा पड़ जाएगा या विरोध का जोश कम हो जाएगा, तो सरकार लोगों को निशाना बनाना शुरू कर सकती है।
दास ने बताया कि यह डर काफी हद तक सही लगता है, क्योंकि दूसरे बड़े विरोध प्रदर्शनों में भी ऐसा ही तरीका अपनाया गया था, जहां लोगों को अलग-थलग करके झूठे मामलों में फंसाया गया था। पहले दिन से ही सभी छात्रों को कानूनी और मेडिकल मदद दी गई है और वकीलों के साथ तालमेल बिठाया गया है ताकि उन्हें देश भर में मदद मिल सके।