चीन का खतरनाक ट्विन प्लान, तिब्बत में रची जा रही भारत के खिलाफ बड़ी साजिश? सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

Twin Strategy: एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन तिब्बत में 'ट्विन स्ट्रैटेजी' के तहत सांस्कृतिक बदलाव और डुअल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं।
China Tibet Twin Strategy
सांकेतिक तस्वीरAI Image
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China Tibet Twin Strategy: भारत और चीन के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। इसी बीच एक नई रिपोर्ट ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन तिब्बत में ‘ट्विन स्ट्रैटेजी’ पर काम कर रहा है। इसमें एक ओर तिब्बती बौद्ध संस्कृति और पहचान को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर ऐसे बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

पवित्र बौद्ध स्थल को रेसकोर्स में बदले जाने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी तिब्बत के खाम क्षेत्र के ड्रैगो काउंटी में स्थित सेंगडेंग गांव की 99 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा वाले धार्मिक स्थल को अब ‘ड्रैगो काउंटी रेड आर्मी कैवेलरी डिवीजन रेसकोर्स’ में बदल दिया गया है। यह स्थान स्थानीय लोगों के लिए “पीपल्स बुद्धा” के नाम से प्रसिद्ध था और वर्षों से तिब्बती बौद्ध श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र माना जाता था। बताया गया है कि वर्ष 2023 से यहां चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े सरकारी कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजन कराए जा रहे हैं।

दोहरे इस्तेमाल वाले इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल

भारतीय खुफिया आकलनों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि तिब्बत में पर्यटन, खेल और ग्रामीण विकास के नाम पर तैयार किए जा रहे कई प्रोजेक्ट वास्तव में डुअल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन सुविधाओं का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों, भारी सैन्य वाहनों और रसद आपूर्ति के लिए भी किया जा सकता है। इससे वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास चीन की सैन्य क्षमता मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है।

सीमावर्ती इलाकों में सैन्यीकरण का आरोप

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सीमावर्ती तिब्बती क्षेत्रों में स्थानीय आबादी को भी सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनाया जा रहा है। बच्चों को कम उम्र से ही सीमा सुरक्षा संबंधी गतिविधियों से जोड़ने और स्थानीय मिलिशिया नेटवर्क के लिए तैयार करने जैसे कार्यक्रम चलाए जाने की बात भी सामने आई है।

जनसांख्यिकीय बदलाव की भी आशंका

रिपोर्ट के अनुसार, चीन तिब्बत के रणनीतिक क्षेत्रों में हान चीनी आबादी के बसाव को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों में मंदारिन भाषा को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि तिब्बती भाषा और सांस्कृतिक शिक्षा का दायरा लगातार सीमित होने का दावा किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा जारी रहता है तो लंबे समय में तिब्बती सांस्कृतिक पहचान पर असर पड़ सकता है।

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भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है तिब्बत?

तिब्बती पठार से ब्रह्मपुत्र, सिंधु और सतलुज जैसी कई प्रमुख नदियों का उद्गम होता है। ऐसे में वहां बड़े पैमाने पर बांध, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण भारत समेत दक्षिण एशिया के देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीमावर्ती इलाकों में सैन्य और नागरिक ढांचे का समानांतर विस्तार जारी रहता है, तो भविष्य में इसका असर भारत-चीन सीमा की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है।

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