जनगणना 2027 में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को माना जाएगा शादीशुदा (सोर्स-सोशल मीडिया)
Census 2027 Live In Relationships: भारत की 16वीं डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही है जिसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लिव-इन संबंधों में रहने वाले जोड़ों को विवाहित माना जा सकता है। जनगणना 2027 में लिव-इन रिलेशनशिप की नई गाइडलाइन्स के तहत नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। आपत्तिजनक सवाल पूछने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और कारावास का प्रावधान भी किया गया है।
भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने यह साफ किया है कि लिव-इन में रहने वाले जोड़ों की गणना विवाहित के रूप में होगी। अगर कोई जोड़ा अपने रिश्ते को एक स्थायी संबंध यानी स्टैबल यूनियन मानता है तो उन्हें विवाहित माना जाना चाहिए। यह फैसला सामाजिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए जनगणना की प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के लिए लिया गया है।
सेंसस एक्ट 1948 की धारा 15 के तहत सरकार ने उत्तरदाताओं को यह भरोसा दिलाया है कि उनकी निजी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। कानून के अनुसार आपकी निजी जानकारी किसी भी बाहरी व्यक्ति या संस्था के साथ जनगणना के दौरान साझा नहीं की जाएगी। सुरक्षा के इन कड़े नियमों का उद्देश्य जनता के बीच जनगणना प्रक्रिया के प्रति विश्वास पैदा करना और गोपनीयता बनाए रखना है।
जनगणना के दौरान अगर कोई अधिकारी जानबूझकर अनुचित या आपत्तिजनक सवाल पूछता है तो उसके खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर अधिकारी को 1,000 रुपये का जुर्माना और तीन साल तक का कठोर कारावास भुगतना पड़ सकता है। महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी राज्यों को पत्र भेजकर इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के अनुसार यह जनगणना दो मुख्य चरणों में पूरी तरह डिजिटल तरीके से आयोजित होगी। पहले चरण में अप्रैल से सितंबर 2026 तक आवासीय सूची और घरों की सुविधाओं का विस्तृत विवरण लिया जाएगा। इसके बाद फरवरी 2027 में दूसरे चरण के तहत आबादी की गणना और व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने का कार्य होगा।
आवासीय गणना के दौरान घर में मौजूद पानी, बिजली, शौचालय, इंटरनेट और वाहनों जैसी सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगी जाएगी। दूसरे चरण में परिवार के सदस्यों का नाम, आयु, जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार और वैवाहिक स्थिति जैसे निजी विवरण लिए जाएंगे। साथ ही शादीशुदा महिलाओं से उनके बच्चों और दिव्यांग सदस्यों से संबंधित जानकारी भी डिजिटल फॉर्म में भरी जाएगी।
यह भारत की पहली ऐसी जनगणना होगी जिसे पूरी तरह डिजिटल मोड में आयोजित किया जा रहा है जिससे प्रक्रिया तेज होगी। सरकार ने नागरिकों को अपनी गणना स्वयं करने का विकल्प भी दिया है जिससे वे अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे। यह आधुनिक तकनीक आधारित जनगणना डेटा के सटीक विश्लेषण और भविष्य की योजनाओं के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी।
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जनगणना अधिनियम की धारा 11 के तहत अगर कोई अधिकारी बिना अनुमति के जानकारी का खुलासा करता है तो वह दंड का पात्र होगा। जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज करना या प्रक्रिया में बाधा डालना भी कानूनन अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इन कड़े प्रावधानों को यह सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और ईमानदारी से संपन्न हो।