बृजभूषण शरण का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू,(डिजाइन फोटो)
Brij Bhushan Sharan Singh Exclusive Interview: इंटरव्यू में, जहां हर सवाल सीधा…और हर जवाब बेहद अहम। लेकिन इस बार सिर्फ शब्द ही नहीं, बल्कि उनकी खामोशी भी बहुत कुछ कहेगी। एक ऐसा इंटरव्यू, जो सिर्फ बातचीत नहीं, बल्कि सियासत के कई राज खोल सकता है। सत्ता के गलियारों से लेकर विवादों के केंद्र तक, उनके सफर के कई पहलू रहे हैं। कुछ खुले तौर पर सामने आए, तो कुछ अब भी परतों में छिपे हुए हैं।
इस खास बातचीत में उन सभी मुद्दों पर बेबाक चर्चा हुई, जिन पर अब तक सिर्फ अटकलें लगती रही हैं। क्या है उनके फैसलों के पीछे की असली कहानी? किन दबावों और परिस्थितियों ने उनके राजनीतिक कदमों को आकार दिया? और वे सवाल, जिनका जवाब आज भी देश जानना चाहता है। इस खास बातचीत में उन्होंने उनका भी जवाब दिया है।
राज ठाकरे के बारे में उनकी क्या राय है? चंद्रशेखर आजाद को लेकर उनका नजरिया क्या है? और उत्तर प्रदेश की सियासत पर उन्होंने क्या बड़ा बयान दिया है। ये सभी पहलू इस बातचीत को और भी खास बनाते हैं।
सवाल: आपसे पहला एक लाइटेड ही सवाल रहेगा कि आपका एक वीडियो अभी वायरल हो रहा था। रंग बरसे भीगेगी चुनर वाली होली मिलन कार्यक्रम में आप एक डांस या कह लें कि थिरक रहे थे आप कुछ और पब्लिक के बीच में ये बड़ा चर्चा में भी आया।
जवाब: देखिए मैं प्रतिवर्ष होली जो है जी गरीब लोगों के साथ मनाता हूं और इस बार थारू समाज के बच्चे आए थे, जनजाति है थारू जनजाति जो नेपाल के बॉर्डर में पाई जाती, तो वहां तीन-चार जिले के बच्चे आए थे तो कोई सॉन्ग बज रहा था। वो लोग डांस कर रहे थे तो उसमें हमने भी थोड़ा सा मनाया। मैं गांव से जुड़ा हूं, तो एक फगुआ गीत होता है जो यहां का अवध का बहुत प्रसिद्ध होता है। तो फगवा गीत भी मैंने थोड़ा सा गाया था, क्योंकि हम खुद पहले गाते थे, तो अब मन है तो गाए।
सवाल: राज ठाकरे की राजनीति पे आपने एक तरीके से माना जाए कि जब आपने उन्होंने बयान दिया और अयोध्या में आने की बात कही आपने उनकी राजनीति पे एक तरीके से बैन लगाया और हालिया दृश्य ये है कि महाराष्ट्र की राजनीति पर भी इसका असर देखने को मिला।
जवाब: देखिए राज ठाकरे से मैंने कोई सोना चांदी नहीं मांगा था, जब मुझे पता चला कि उनका हृदय परिवर्तन हो गया है और अयोध्या आना चाहते हैं तो जैसे भगवान राम अवध से जुड़े हैं और अवध का अगर इसको विस्तृत क्षेत्र में कहिए तो उत्तर भारत से जुड़े, जबकि उनका पूरा दक्षिण भारत तक भी पूरी यात्रा हुई वह सारी कथा जो है दक्षिण भारत की है। लेकिन यहां आना चाहते थे, और राज ठाकरे की राजनीति ही थी उत्तर भारतीयों के खिलाफ, उनको बेइज्जत करना और उसमें कमजोर लोगों को बेइज्जत करना, जिसका परिणाम इनको अभी हाल के चुनाव में मिल गया.
सवाल: आपने हाल ही में जो राष्ट्रकथा का आयोजन करवाया था उसमें रितेश्वर महाराज जी ने जब मंच से कहा कि दबदबा है और दबदबा रहेगा। उसके बाद आप भावुक हुए थे।
जवाब: नहीं, नहीं…. मैं कोई पिक्चर देखता हूं उसमें भी भावुक होता हूं और हम चाह के भी रोक नहीं पाते हैं। चाहते हैं रोक नहीं पाते हैं। तो सतगुरु रितेश्वर जी महाराज की जब कथा हो रही थी तो उस समय कई बार मैं भावुक हुआ हूं। कई बार एक बार नहीं कई बार भावुक हुआ हूं। जब कोई ऐसा प्रसंग आता है जो दिल को छूता है जिसका असर पड़ता है तो भावुक हो जाता हूं। तो इसमें कोई नई बात नहीं है। और दबदबा माने प्रभाव। प्रभाव। दबदबा का गलत अर्थ लगाया जा रहा है। दबदबा माने प्रभाव। दबदबा को अगर आपने देखा ही होगा आप एक्टिव रहते हैं। अखिलेश यादव जी ने भी एक गाने के जरिए अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। अब तो दबदबा क्रिकेट की टीम जीती है तो उसमें भी दबदबा शब्द का प्रयोग हुआ है। पंचायत अब तो कई फिल्मों में भी हो रहा है। वो दबदबा वाला डायलॉग पहली बार हमारे मुंह से ही निकला था। अब दबदबा है रहेगा। अब ये एक कॉमन चीज हो गया है। और ये कहीं भी जब प्रयोग होता है तो मेरे नाम से जाना जाता है।
ज्यादा जानने के लिए देखिए ये खास इंटरव्यू….