जनता नासमझ है! बिहार की हार पर चिदंबरम के 'ज्ञान' से बवाल, BJP बोली- 'प्रिंस' को बचाने के प्रयास

Bihar Result में करारी हार के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम के एक लेख पर राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। उनके विचार पर भाजपा ने तीखा हमला बोलते हुए इसे बिहार की जनता का अपमान बताया।
bjp-slams-p-chidambaram-column-blaming-bihar-voters-for-poll-loss-shehzad-poonawalla-hindi
भाजपा ने चिदंबरम पर चुनाव हार के लिए बिहार के मतदाताओं को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया
Updated on

P Chidambaram vs Shehzad Poonawalla on Bihar Poll: बिहार चुनाव में हार के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम के एक लेख पर राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। चिदंबरम ने अपने कॉलम में नतीजों का विश्लेषण करते हुए इशारों में वोटरों पर ही सवाल उठा दिए। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर अपनी विफलताओं को छिपाने और हार का ठीकरा सीधे बिहार की जनता पर फोड़ने का आरोप लगाया है।

शहजाद पूनावाला ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस ने एक बार फिर आत्मनिरीक्षण करने के बजाय 'जनता को दोष देकर अपने राजकुमार' का बचाव करना चुना है। पूनावाला ने चिदंबरम के लेख का हवाला देते हुए पूछा, "चिदंबरम लिखते हैं 'उन्हें सत्ता में लाना मतदाताओं की जिम्मेदारी है'। ये लोग कितने हक में डूबे और भ्रमित हैं?" उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का पुराना तरीका रहा है।

चिदंबरम ने लेख में क्या कहा?

भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा, "कभी EVM को दोष दो, कभी SIR को, और अब बिहार की जनता को दोष दो। 95 हार के लिए राहुल को दोष मत दो। राहुल कोई गलती नहीं कर सकते, जनता गलत है! कांग्रेस ने फिर बिहार का अपमान किया है।" चिदंबरम ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' में 'वोटिंग इज नॉट द एंड ऑफ रिस्पांसिबिलिटीज' (वोट देना ही जिम्मेदारियों का अंत नहीं है) शीर्षक से यह कॉलम लिखा था जिस पर भाजपा ने हमला बोला है। इसमें उन्होंने NDA को 202 और महागठबंधन को 35 सीटें मिलने वाले जनादेश का विश्लेषण किया।

'वोटरों ने बदलाव क्यों नहीं चुना?'

पूर्व वित्त मंत्री ने लिखा कि नागरिकों को परिणाम स्वीकार करना चाहिए, लेकिन उन्हें यह भी जांचना होगा कि राज्य इतने गहरे संरचनात्मक संकटों का सामना क्यों कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों ने "लालू प्रसाद के 15 साल के शासन" और नीतीश कुमार के लंबे शासन को भी याद किया, लेकिन फिर भी "भारी बेरोजगारी, काम के लिए करोड़ों का पलायन, बहुआयामी गरीबी, भयावह शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति, और शराबबंदी की विफलता" के बावजूद बदलाव के लिए वोट नहीं दिया।

पी चिदंबरम ने तर्क दिया कि इन परिस्थितियों को देखते हुए, "इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि लोगों ने ऐसा मतदान क्यों किया"। उन्होंने लिखा कि बिहार के मतदाताओं को "चंपारण युग की भावना को फिर से खोजना होगा" और अयोग्य शिक्षकों, निष्क्रिय स्कूलों, पेपर लीक, हेरफेर वाले परीक्षा परिणामों और नौकरियों की पुरानी कमी को स्वीकार करने से इनकार करना होगा। उन्होंने लिखा कि बिहार के युवाओं को "चुपचाप स्वीकार नहीं करना चाहिए" कि उन्हें उन राज्यों में पलायन के लिए मजबूर किया जाए "जहां के लोग, भाषा, भोजन और संस्कृति उनके लिए अजनबी हैं"।

Navbharat Live
navbharatlive.com