भाजपा शासित राज्यों में सबसे अधिक नफरती भाषण….ये CM अव्वल, योगी कितने नंबर पर? देखें लिस्ट
BJP Leaders on Hate Speech Case: एक एनजीओ के मुताबिक 2025 में भारत में 1318 नफरती भाषण दर्ज किए गए। इनमें 98% भाषणों में मुस्लिम और ईसाई निशाने पर रहे। सबसे अधिक नफरती भाषण पुष्कर सिंह धामी ने दिए।
- Written By: रंजन कुमार
सीएम योगी, सीएम पुष्कर सिंह धामी और हिंदूवादी नेता प्रवीण तोगड़िया।
Hate Speech Case in India: भारत विविध धर्मों, अलग-अलग खानपान, समृद्ध संस्कृति के लिए दुनिया भर में खास पहचान रखता है। यहां के वसुधैव कुटुंबकम के नारे को कई देश आत्मसात करते हैं। मगर, कुछ दिनों में हुईं कुछ घटनाओं और नेताओं ने इस छवि को धूमिल किया है।
दक्षिणपंथी विचारधारा वाले कई नेता मंचों से नफरत को आम कर दिया है। अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित एक गैर सरकारी संस्थान (NGO) की नई रिपोर्ट ने हिंदूवादी और दक्षिणपंथी सोच से जुड़े नेताओं के भाषणों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
द इंडिया हेट लैब के प्रोजेक्ट में खुलासे
बीबीसी ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कई खुलासे किए हैं। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में भारत में नफरती भाषणों का सैलाब आया। इसमें सबसे ज्यादा चोट मुस्लिम और ईसाई अल्पसंख्यकों पर पड़ी। वॉशिंगटन के एनजीओ ने भारत में नफरती भाषण यानी हेट स्पीच को लेकर विस्तृत रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट 2025: हेट स्पीच इवेंट्स इन इंडिया नाम से प्रकाशित हुई है। इसकी शुरुआत में ही कहा गया है कि यह सीएसओएच (CSOH) के द इंडिया हेट लैब प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
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2025 में नफरती भाषण के 1,318 मामले दर्ज
रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत में प्रत्यक्ष रूप से नफरती भाषण के 1318 मामले दर्ज हुए। यह आंकड़ा 2024 की तुलना में 13% ज्यादा है। 2023 की तुलना में 97% ज्यादा है। मतलब दो साल में नफरती भाषणों की रफ्तार दोगुनी हो गई है। इस तरह के नफरती भाषण को बढ़ावा देने और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने का भाजपा नेताओं, हिंदूवादी संगठनों के नेताओं पर आरोप लगते रहे हैं। इसका जिक्र रिपोर्ट में है।
भाजपा शासित राज्यों में 88% नफरती घटनाएं
रिपोर्ट बताती है कि कुल नफरती घटनाओं में से 88% भाजपा शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज हुईं हैं। इसके विपरीत 7 विपक्ष शासित राज्यों में 154 घटनाएं सामने आईं। ये 2024 के 234 मामलों के मुकाबले 34% कम हैं। महीनों के हिसाब से देखें तो अप्रैल में सबसे ज्यादा नफरती भाषण दिए गए। इसी महीने में 158 घटनाएं दर्ज हुईं। खासकर 22 अप्रैल से 7 मई के बीच पहलगाम हमले और उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान 98 प्रत्यक्ष नफरती भाषण आए।
नफरती भाषणों में किन शब्दों का सबसे अधिक इस्तेमाल?
रिपोर्ट कहती है कि 656 भाषणों में लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद, शिक्षा जिहाद, वोट जिहाद जैसे शब्दों का खुलकर इस्तेमाल हुआ है। 308 भाषणों में हिंसा भड़काने की बात सामने आई। इनमें से 136 मामलों में लोगों से हथियार उठाने तक की अपील की गई।
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सीएम धामी ने सबसे अधिक दिए नफरती भाषण
276 भाषणों में धार्मिक स्थलों को गिराने की मांग उठी। इनमें खासकर ज्ञानवापी और शाही ईदगाह मस्जिद निशाने पर थे। 141 भाषणों में अपमानजनक और गाली-गलौज का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट में उन नेताओं की लिस्ट जारी की गई है, जिनके नाम सबसे अधिक नफरती भाषणों से जुड़े। रिपोर्ट का दावा है कि धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और मुसलमानों के खिलाफ नफरती भाषण देने के मामले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले नंबर पर हैं। इन्होंने 71 नफरती भाषण दिए हैं।
योगी 9वां पायदान पर
दूसरे पायदान पर प्रवीण तोगड़िया रहे। इनके नाम से जुड़े 46 भाषण आए। तीसरे नंबर पर भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय, जिनसे जुड़े 35 भाषण रिपोर्ट में दर्ज हैं। टॉप-10 लोगों की लिस्ट में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हैं। योगी 22 भाषणों के साथ नौवें नंबर पर हैं। अक्सर विवादों में रहने वाले यति नरसिंहानंद सरस्वती 20 भाषणों के साथ 10वें पायदान पर हैं।
