BJP Foundation Day Special: अटल-आडवाणी से मोदी-शाह की जोड़ी तक भाजपा ने तय किया फर्श से अर्श तक का सफर
BJP Foundation Day: भाजपा आज अपना 45वां स्थापना दिवस मनाने जा रही है। आज यह देश की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। जानें अटल-आडवाणी से लेकर मोदी-शाह की जोड़ी तक कैसा रहा भाजपा का सफर।
- Written By: यतीश श्रीवास्तव
भाजपा स्थापना दिवस पर विशेष खबर, अटल-आडवाणी से लेकर मोदी-शाह की जोड़ी तक का सफर
BJP Foundation Day Special: भारतीय जनता पार्टी आज अपना 45वां स्थापना दिवस समारोह मना रही है। सत्ताधारी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं में इसे लेकर खासा उत्साह है। काफी बड़े स्तर पर कार्यक्रम की तैयारी हो रही है। आज लोकसभा में भाजपा की 240 सीटें हैं और एनडीए गठबंधन के साथ वह केंद्र में है। भाजपा के ये सफर आसान नहीं था। लोकसभा में 2 सीटों से 240 सीटों का सफर तय करने में पार्टी को कठिन परिश्रम और चुनौतियों का सामना करना पड़ा। चार दशकों में पार्टी ने लोकसभा में 2 सीटों से 240 सीटों तक का सफर यूं ही नहीं तय किया, इसके पीछे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की मेहनत छिपी है।
जनसंघ से जुड़ी हैं भाजपा की जड़ें
भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 में हुई थी, लेकिन इसकी जड़ें भारतीय जनसंघ से जुड़ी हैं। दरअसल पाकिस्तान और बांगलादेश में में हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर भारत की चुप्पी से डॉ. श्यामा प्रसद मुखर्जी काफी परेशान थे जिसके बाद उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद ही उन्होंने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की। भारतीय जनसंघ ने कश्मीर को विशेषाधिकार देने का विरोध किया जिसपर उन्हें जेल में कैद कर दिया गया, जहां संदिग्ध हालात में उनकी मौत हो गई।
जनता पार्टी से इतर बनाई थी भारतीय जनता पार्टी
भारतीय जनसंघ लगातार अपने अथक प्रयासों के साथ आगे बढ़ रही थी जिसके कांग्रेस का एकाधिकार टूटने लगा था। 1977 में जब आपात काल खत्म कर इंदिरा गांधी ने चुनाव कराने का निर्णय लिया तो जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में कांग्रेस के सभी विरोधी दल एकजुट हुए और ‘जनता पार्टी’ बनाई। भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में 1 मई 1977 को विलय हुआ। चुनाव में तब जनता पार्टी 2 ही सीट जीत सकी। हालांकि ये साथ ज्यादा दिन नहीं रहा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोग जनता पार्टी के नेताओं की आंखों में खटकने लगे। इसके बाद 6 अप्रैल 1980 को नए संगठन के रूप में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की गई। अटल बिहारी बाजपेयी भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किए गए।
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अटल और आडवाणी की जोड़ी ने उठाए मुद्दे
अटल बिहारी बाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी की जोड़ी ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट किया और आगे बढ़ना शुरू हुई। 1989 में पार्टी ने रामजन्म भूमि आंदोलन शुरू किया। इसमें सोमनाथ से राम रथयात्रा निकाली गई जिसे भारी समर्थन मिला। बिहार में लालू सरकार में आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया। आंदोलन ने तेजी पकड़ी तो 1991 में भाजपा सीटें बढ़कर 120 तक पहुंच गईं। अटल और आडवाणी की रणनीती से 1993 में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल और मध्य प्रदेश में भाजपा ने कई सीटें जीतीं। फिर 1995 में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, ओडिशा, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र में भाजपा को जीत मिली।
1996 में बड़ी पार्टी बनकर उभरी
1996 में भाजपा को 161 सीट मिली और वह लोकसभा में सबसी बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। तब अटल बिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री बने लेकिन बहुमत नहीं होने से सरकार गिर गई। बाद में सहयोगी दलों के साथ भाजपा ने एनडीए बनाया जिसके बाद 1999 में कांग्रेस को हार मिली। 303 सीटों के साथ एनडीए ने सरकार बनाई। भाजपा ने तब 183 सीटें हासिल की थीं। अटल बिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री बनाए गए और लालकृष्ण आडवाणी गृहमंत्री बने।
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मोदी-शाह ने तैयार किया अभेद्य किला
वर्ष 2004 और 2009 में लगातार हार के बाद भाजपा के दो दिग्गज नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने पुरानी धुरी पर नया समीकरण रचा। राम मंदिर, हिन्दुत्व और काला धन वापस लाने को मुद्दा बनाकर जनता गए ग्राउंड लेवल पर काम किया। नतीजा ये रहा कि 2014 में पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया 282 सीटें जीतीं। कुल 543 सीटों में से एनडीए ने 336 रिकार्ड सीटें प्राप्त कीं। इसके बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनाए गए। भाजपा ने 2019 मं 303 सीटें हासिल कर दोबारा जीत दर्ज की। फिर से पीएम मोदी प्रधानमंत्री चुने गए। मोदी और शाह की जोड़ी ने अयोध्या राम मंदिर बनाने का वादा पूरा किया और 2024 में भी भाजपा ने 240 सीटों पर जीत हासिल की और एनडीए को कुल 272 सीटों पर जीत मिली।
