दिल्ली: लोकसभा चुनाव ( Lok Sabha Elections 2024) के लिए भाजपा (BJP) ने करीब 100 उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार कर ली है। इन नामों पर औपचारिक मुहर के लिए 29 फरवरी को मीटिंग होने वाली है। उसके बाद किसी भी समय ऐलान हो सकता है। ये उम्मीदवार उन सीटों पर घोषित किए जाएंगे, जिन्हें पार्टी अपने लिए कठिन मानकर चल रही है। जिन 100 सीटों पर कैंडिडेट्स का ऐलान होगा, उनमें महाराष्ट्र, यूपी, बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्य शामिल हैं। इन सीटों पर भाजपा को 2019 के आम चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
ऐसे में पार्टी चाहती है कि यहां थोड़ा पहले से ही तैयारी कर ली जाए। उम्मीदवार समय रहते ही घोषित हो जाएं ताकि वे क्षेत्र में प्रचार शुरू कर सकें। खुद पीएम नरेंद्र मोदी तमिलनाडु, लक्षद्वीप, केरल, तेलंगाना समेत दक्षिण भारत के राज्यों का दौरा कर चुके हैं। इसके पीछे भी यही रणनीति थी कि पार्टी जहां कमजोर है, वहां अपनी पकड़ को मजबूत कर लिया जाए। पार्टी ने कुल 160 सीटों को चुना है, जिन पर वह खुद को कमजोर मान रही है। पिछले करीब 2 वर्षों से इन सीटों पर जनसंपर्क अभियान चल रहा है। केंद्रीय मंत्रियों या बड़े नेताओं को यहां का प्रभारी बनाया गया है और वे दौरे कर रहे हैं।
भाजपा जो पहली लिस्ट जारी करने वाली है, उनमें कुछ केंद्रीय मंत्री भी शामिल हो सकते हैं। केंद्रीय नेतृत्व से मंजूरी के बाद ही ऐलान होगा। इसीलिए 29 फरवरी को केंद्रीय चुनाव समिति की मीटिंग बुला ली गई है। पहले यह मीटिंग 22 फरवरी को ही होनी थी, लेकिन नेताओं की व्यस्तता के चलते इसे टाल दिया गया था। भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चे की मीटिंग भी पहले 29 फरवरी को थी, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद रहने वाले थे। अब इस आयोजन को टाल दिया गया है क्योंकि नड्डा भी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में रहेंगे।
पिछले दिनों हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने कमजोर सीटों पर पहले ही उम्मीदवार तय कर दिए थे। इसके अलावा उसने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नेताओं को भी विधायकी लड़ा दी थी। अब लोकसभा में भी यही रणनीति रहेगी और कई ऐसे केंद्रीय मंत्री भी चुनावी समर में दिख सकते हैं, जो अब तक राज्यसभा के ही मेंबर रहे हैं। पंजाब और आंध्र प्रदेश में गठबंधन पर भी मंथन चल रहा है और उसके बाद ही इन राज्यों की सीटों का ऐलान होगा। बिहार को लेकर भी पार्टी में चर्चा चल रही है क्योंकि यहां कई साझीदार हैं और सीट बंटवारे में सबकी दावेदारी से निपटना है।