नवभारत संपादकीय: केरल चुनाव, एलडीएफ और यूडीएफ के बीच सीधी टक्कर
LDF vs UDF: केरल में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला एलडीएफ और यूडीएफ के बीच माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन तीसरी बार सत्ता में लौटने की उम्मीद जता रहे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
Kerala Assembly Election ( Source: Social Media )
Kerala Assembly Election: केरल में 9 अप्रैल को होने जा रहे विधानसभा चुनाव में हमेशा की तरह मुख्य मुकाबला माकपा नेतृत्व के एलडीएफ तथा कांग्रेस नेतृत्व के यूडीएफ के बीच होगा। यद्यपि चुनावी त्रिकोण का तीसरा कोण बीजेपी है, लेकिन वह गिनी-चुनी सीट ही जीत पाएगी।
पिछले 10 वर्षों से केरल में एलडीएफ (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) सत्ता में है। पिनाराई विजयन राज्य के पहले मुख्यमंत्री हैं, जो इतने वर्षों से सत्ता में रहे और तीसरा टर्म जीतने की भी पूरी उम्मीद रखते हैं।
देश में बंगाल और त्रिपुरा से कम्युनिस्टों के पैर उखड़ जाने के बाद केवल केरल में ही लेफ्ट पार्टियों की सरकार बची हुई है। यद्यपि केरल में आर्थिक संकट है।
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केंद्र सरकार से टकराव चलता रहता है और प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं लेकिन एलडीएफ का चुनाव अभियान विकास और कल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धि पर आधारित है।
वहां सामाजिक सुरक्षा पेंशन, गरीबी निवारण तथा लाइफ मिशन के तहत आवास निर्माण को बढ़ावा दिया गया है। इनके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बुनियादी ढांचे में निवेश किया गया। इतने पर भीस एलडीएफ में बागी उम्मीदवार बड़े हैं, जिनमें वरिष्ठ माकपा नेता भी शामिल हैं।
इन बागियों में कुछ को यूडीएफ का समर्थन है। 2025 के स्थानीय निकाय चुनाव में अधिकांश स्थानों पर कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इससे संकेत मिला कि इस बार जनता बदलाव चाहती है और विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का वोट देगी।
कांग्रेस नेताओं में उत्साह देखा जा रहा है। इतने पर भी कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक कमजोर पड़ा है, जिसमें सवर्ण हिंदू, सीरियाई ईसाई व मुस्लिम शामिल हैं। कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर भी टकराव है। ओमन चंडी के निधन और एके एंटोनी के सक्रिय राजनीति छोड़ देने की वजह से विश्वसनीय नेतृत्व की कमी देखी जा रही है।
शशि थरूर के रवैये से कांग्रेस हाईकमांड खुश नहीं हैं। कांग्रेस ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर राजनीति की थी लेकिन अब यह मुद्दा चुनावी वजन नहीं रखता।
इन दोनों मोचों के अलावा बीजेपी भी अपना आधार जमाने की कोशिशों में लगी है। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता मध्यमवर्गीय लोगों तथा तकनीक से जुड़ी युवा पीढ़ी को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
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बीजेपी ने त्रिसूर से लोकसभा चुनाव जीता था तथा तिरूवनंतरपुरम के निकाय चुनाव में सफलता पाई थी, उसके निशाने पर मंजेश्वरम, पलक्कड और नेमीम जैसे विधानसभा क्षेत्र हैं।
यद्यपि बीजेपी विधानसभा चुनाव में कोई गंभीर दावेदार नहीं है फिर भी उसने कुछ क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाकर चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है। दक्षिणी राज्यों में धैर्ष के साथ धीरे-धीरे आधार जमाना बीजेपी की रणनीति है। केरल में आरएसएस और माकपा के बीच कई दशकों से हिंसक टकराव रहा है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
