जयंती विशेष: सरदार वल्लभभाई पटेल ने क्यों की थी पं. जवाहरलाल नेहरू की तारीफ, जानिए क्या बोले थे लौहपुरुष?
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू हमेशा ही चर्चा में रहे। आज यानी गुरुवार 14 नवंबर को उनकी 135वीं जयंती है। पंडित नेहरू पर दो धड़े आपस में बंटे हुए भी नजर आए।
- Written By: अभिषेक सिंह
पं. जवाहरलाल नेहरू (सोर्स-सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू हमेशा ही चर्चा में रहे। आज यानी गुरुवार 14 नवंबर को उनकी 135वीं जयंती है। पंडित नेहरू पर दो धड़े आपस में बंटे हुए भी नजर आए। एक पक्ष नेहरू का बखान करता रहा तो दूसरा पक्ष नेहरू का अपमान करता रहता है। लेकिन सही मायनों में पंडित नेहरू क्या थे वो आपको यह आर्टिकल पढ़कर पता चल जाएगा।
पंडित नेहरू की रुचियां, नफासत, उनके शौक और उनके नाम पर संपत्ति भी कभी कम चर्चा का विषय नहीं रही। उनके पिता पंडित मोतीलाल नेहरू देश की मशहूर शख्सियत थे, इसलिए उनका रुतबा भी उतना ही बड़ा था। प्रयागराज में पंडित मोतीलाल का आनंद भवन आज अपनी शान और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है।
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सालों बाद उनकी पोती नयनतारा सहगल ने आनंद भवन के बारे में लिखा- “माघ मेले के दौरान गंगा और यमुना के संगम पर स्नान करने के बाद हजारों लोग यहां जुटते थे और जवाहरलाल नेहरू को देखने के लिए उमड़ पड़ते थे।” इससे पता चलता है कि जवाहरलाल और उनका आनंद भवन कितना महान था। यह जवाहरलाल नेहरू का सबसे महत्वपूर्ण निवास था, जो स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा आधार था।
जहां रखी गई ‘असहयोग’ की नींव
यह काफी भव्य था, यहीं से असहयोग आंदोलन की नींव रखी गई थी। अब यह एक संग्रहालय है। इसे देश को समर्पित कर दिया गया है। आर्किटेक्ट आभा नारायण लांबा 2013 से इसकी देखभाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा- ट्रस्टी सोनिया गांधी ने इसका पूरा ख्याल रखा है। मोतीलाल नेहरू ने स्वराज भवन को 20 हजार रुपये में खरीदा था। पहले इसका नाम महमूद मंजिल था। स्वराज भवन में 42 कमरे थे। 1920 के दशक में करोड़ों की कीमत वाली ये संपत्ति भारतीय कांग्रेस को दान कर दी गई थी।
देश को दान कर दिया ‘आनंद’
उन्होंने सिविल लाइंस के पास एक और बड़ी संपत्ति खरीदी। इसका नाम उन्होंने आनंद भवन रखा। इसमें अनूठी और कीमती वस्तुएं और फर्नीचर था। आनंद भवन का फर्नीचर यूरोप और चीन से आता था। इंदिरा गांधी ने 1970 में एक ट्रस्ट बनाकर इसे देश को समर्पित कर दिया था।
देश को दान की 98 फीसदी संपत्ति
एक आंकड़े के मुताबिक 1947 में देश की आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू की संपत्ति करीब 200 करोड़ रुपये की थी और उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का 98 फीसदी हिस्सा देश को समर्पित कर दिया था। नेहरू जब प्रधानमंत्री बने तो उनकी गिनती देश के मशहूर अमीरों में होने लगी। इसके बाद उन्होंने अपनी संपत्तियां राष्ट्र निर्माण के लिए दान कर दीं।
देश के नाम पर महादान करने की यह घटना 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद हुई थी। कई उद्योगपतियों ने देश के विकास के लिए अपनी संपत्ति दान कर दी थी, वहीं जवाहरलाल नेहरू ने भी अपनी 98 फीसदी संपत्ति दान कर दी थी। उस समय उनके पास 200 करोड़ की संपत्ति थी। आनंद भवन को छोड़कर।
सरदार पटेल ने की तारीफ
नेहरू और पटेल के बीच मतभेदों को लेकर अक्सर बहस होती रहती है और नए-नए तथ्य सामने रखे जाते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि सरदार पटेल ने नेहरू के दान की तारीफ की थी। उन्होंने लिखा था- भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नेहरू से ज्यादा किसी व्यक्ति ने बलिदान नहीं दिया और किसी परिवार ने भारतीय स्वतंत्रता के लिए नेहरू के परिवार से ज्यादा कष्ट नहीं झेले। उन्होंने आगे लिखा- मोतीलाल नेहरू ने अपनी आजीविका त्याग दी, अपनी शानदार हवेली स्वतंत्रता आंदोलन के सैनिकों को सौंप दी। और खुद एक छोटे से घर में रहने चले गए।
नेहरू-गांधी के नाम पर देश में क्या?
2013 में एक आरटीआई से पता चला कि देशभर में नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर 450 योजनाएं, इमारतें, प्रोजेक्ट और संस्थान हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर देश में कई शैक्षणिक संस्थान खोले गए। कई संस्थानों की स्थापना की गई। इनमें उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और बच्चों की शिक्षा के लिए देशभर में जवाहर नवोदय विद्यालय शामिल हैं।
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इसके अलावा जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, पांडिचेरी, जवाहर भारती कॉलेज, कावली, आंध्र प्रदेश, जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च, बैंगलोर, कर्नाटक, जवाहरलाल नेहरू नेशनल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, शिमोगा, कर्नाटक और जवाहरलाल नेहरू एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, जबलपुर, मध्य प्रदेश आदि हैं।
