Himanta Biswa Sarma On GI Tagged Products: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि राज्य के पारंपरिक और स्वदेशी उत्पाद अब वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि असम में निर्मित वस्तुएं दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंच रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य की सांस्कृतिक तथा कृषि विरासत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि असम के विशेष उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और राज्य सरकार इन्हें अधिक से अधिक वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
हाल के वर्षों में जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। तेजपुर लीची की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप को सिंगापुर भेजा जाना इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। राज्य सरकार पारंपरिक उत्पादों की ब्रांडिंग, बौद्धिक संपदा संरक्षण और निर्यात को बढ़ावा देकर स्थानीय किसानों, बुनकरों और कारीगरों की आय बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
सीएम सरमा ने कहा कि असम के अनूठे उत्पादों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है और राज्य सरकार का लक्ष्य असम की बेहतरीन वस्तुओं को दुनिया के और अधिक देशों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा, “असम के विशेष उत्पाद वैश्विक बाजारों में अपनी जगह बना रहे हैं और राज्य की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर रहे हैं। हम भविष्य में असम के और अधिक उत्कृष्ट उत्पादों को विश्व बाजार तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
इसी महीने सरमा ने गुवाहाटी से सिंगापुर के लिए जीआई-टैग प्राप्त तेजपुर लीची की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप को रवाना किया था। उन्होंने इसे असम के बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस पहल से स्थानीय किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार पारंपरिक उत्पादों की ब्रांडिंग और बौद्धिक संपदा संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है। हाल ही में असम के चार विरासत उत्पादों बिहू पेपा, कार्बी आंगलोंग हथकरघा, बह शिल्प (बांस शिल्प) और देओरी हथकरघा उत्पादों को जीआई टैग प्रदान किया गया है। इससे इन उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होने के साथ-साथ घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उनका मूल्य बढ़ने की संभावना है।
बता दें कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार कृषि, हथकरघा और पारंपरिक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई पहल कर रही है। हाल के सप्ताहों में विशेष रूप से भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
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मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि असम के स्वदेशी और पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना राज्य सरकार की प्रमुख रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों की आजीविका को मजबूत करना, पारंपरिक शिल्प और संस्कृति का संरक्षण करना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असम की आर्थिक पहचान को और सशक्त बनाना है।