Assam Election BJP Victory Trends: असम विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती नतीजों ने राज्य की सियासी तस्वीर साफ कर दी है। सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला NDA गठबंधन ऐतिहासिक जीत की तरफ बढ़ रहा है।
ECI के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भाजपा गठबंधन 126 में से 85 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े (64) से बहुत ज्यादा है। अगर यही रुझान अंतिम नतीजों में बदलता है तो मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा असम में जीत की ‘हैट्रिक’ लगा लेगी।
जालुकबारी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भारी मतों से आगे चल रहे हैं। वहीं, विपक्षी दलों के लिए शुरुआती रुझान काफी निराशाजनक रहे हैं। राज्य में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे गौरव गोगोई जोरहाट सीट पर कड़े मुकाबले में पिछड़ते हुए रहे हैं। वहीं, रायजोर दल के अखिल गोगोई और असम जातीय परिषद (AJP) के लुरिनज्योति गोगोई भी अपनी-अपनी सीट गवांते नजर आ रहे हैं, जिसे विपक्षी खेमे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक विशेशषज्ञों की मानें तो बीजेपी की इस संभावित जीत के पीछे 5 प्रमुख कारण हैं...
1. हिमंता बिस्वा सरमा का फायरब्रांड नेतृत्व
असम में भाजपा की ताकत का सबसे बड़ा आधार खुद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की लोकप्रियता है। उनकी एक्टिव कार्यशैली और जनता से सीधा संवाद उनको एक मजबूत नेता के तौर पर स्थापित कर चुका है। असम के वोटरों ने उनके चेहरे पर एक बार फिर भरोसा जताया है।
2. परिसीमन वाले दांव का फायदा
साल 2023 में हुए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन ने राज्य के सिय़ासी समीकरणों को पूरी तरीके से बदल दिया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 126 सीटों के नए निर्धारण ने एनडीए (NDA) के पक्ष में ‘चुनावी गणित’ को बहुत मजबूत किया, जिससे कई सीटों पर भाजपा को सीधे फायदा मिलता देखा जा सकता है।
3. सरकारी योजनाओं में ‘महिला कार्ड’
असम की ‘ओरुनोडोई योजना’ ने महिलाओं, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच भाजपा की पैठ मजबूत की है। इसके सीथ ही राज्य सरकार की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास से ग्रामीण इलाकों में भाजपा को बढ़त मिली है।
4. वोटों का ध्रुवीकरण और कड़े फैसले
चुनाव में भाजपा ने ‘अवैध घुसपैठ’ और अतिक्रमण के खिलाफ बहुत सख्त रुख अपनाया है। समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का वादा और सरकारी जमीनों को खाली कराने जैसे मुद्दों से बहुसंख्यक मतदाताओं में पार्टी की पकड़ मजबूत हुई है।
5. बिखरा हुआ विपक्ष
कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन जमीन पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाया। गठबंधन के अंदर तालमेल की कमी और कांग्रेस के बीच वोटों के बंटवारे का सीधा फायदा भाजपा को मिला है। राज्य में बड़े चेहरों के अभाव ने बीजेपी की राह को और आसान बना दिया था।
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कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को उम्मीद थी कि ऊपरी असम की चाय बागान बेल्ट और मुस्लिम बहुल सीटों पर उन्हें बड़ी बढ़त मिलेगी, लेकिन अब तक के रुझानों के अनुसार, बीजेपी ने इन क्षेत्रों में भी सेंध लगा दी है। चुनावी नतीजों की दोपहर तक स्थिति और भी स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन फिलहाल गुवाहाटी से लेकर डिब्रूगढ़ तक भाजपा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है।