केंद्रीय मंत्री अमित शाह, (सोर्स- संसद टीवी)
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के अंदर से नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च की समयसीमा तय की है। अब यह डेडलाइन करीब आ गई है। इस समयसीमा के ठीक एक दिन पहले लोकसभा में इस दिशा में किए गए प्रयासों पर चर्चा हुई। लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर नियम 193 के तहत चर्चा की शुरुआत शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के सांसद डॉक्टर श्रीकांत शिंदे ने की है।
नक्सलवाद के मुद्दे पर लोकसभा में बोलते हुए अमित शाह ने काह कि रेड कॉरिडोर में गिने जाने वाले 12 राज्य और आदिवासियों की ओर से आपका चर्चा के लिए धन्यवाद देता हूं। वे सालों से चाहते थे कि यह व्यवस्था एकबार संसद में उजागर हो और पूरी दुनिया उसको जाने। मगर लंबे समय तक उसको मौका नहीं दिया गया।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ये जो हथियारी मूवमेंट के वकील बने हुए हैं, कहते हैं हमारे साथ अन्याय हो रहा है। अन्याय हो रहा है तो उसके लिए व्यवस्थाएं बनी हैं। अदालतें बनी हैं। हथियार उठा लोगे। संविधान को नहीं मानोगे। ऐसा नहीं चलेगा। ये नरेंद्र मोदी की सरकार है। जो भी हथियार उठाएगा, उसका यही अंजाम होगा। उन्होंने आगे कहा कि बस्तर में लाल आतंक की परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं पहुंचा। राजकुमार रौत जैसे साथी कह रहे हैं आदिवासी का विकास नहीं हुआ।
अमित शाह ने कहा कि 70 में से 60 साल तो सरकार कांग्रेस की रही। फिर क्यों विकास नहीं हुआ। आपने क्यों नहीं किया विकास आज आप हिसाब मांग रहे हो। मैं पूरा बताऊंगा। वहां करोड़ों लोग गरीबी में वर्षों तक जीते रहे, किसी ने चिंता नहीं की। 20 हजार युवा मारे गए, कई दिव्यांग बन गए और उन तक विकास नहीं पहुंचा। कौन जिम्मेदार है। क्या देश की सबसे बड़ी पंचायत को इस पर चिंतन नहीं करना चाहिए। नक्सलवाद का मूल कारण विकास की डिमांड नहीं, एक आइडियोलॉजी है। जिसे एक राष्ट्रपति चुनाव के कारण इंदिरा गांधी ने स्वीकार कर लिया।