भारत-पाक तनाव के बीच मुस्लिम बोर्ड का बड़ा बयान, 'युद्ध किसी मुद्दे का समाधान नहीं, आपसी बातचीत से...'

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भारत और पाकिस्तान टेंशन के मद्देनजर अपना बयान जारी किया है और कहा है कि दोनों देशों को आपसी बातचीत से मुद्दों को सुलझाना चाहिए क्योंकि युद्ध किसी मुद्दे का समाधान नहीं हो सकता।
भारत-PAK तनाव के बीच मुस्लिम बोर्ड का बडा बयान, 'युद्ध किसी मुद्दे का समाधान नहीं, आपसी बातचीत से...'
मुस्लिम लॉ बोर्ड, फोटो - सोशल मीडिया
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नई दिल्ली : भारत पाकिस्तान के इस तनाव भरे माहौल में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। बहरहाल स्थिति यह बनी हुई है कि कभी भी औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा हो सकती है। इस बीच भारत-पाक टेंशन को लेकर वैश्विक नेता डोनाल्ड ट्रंप से लेकर ऋषि सुनक तक के बयान सामने आ चुके हैं। अब इसे लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी बयान जारी कर दया है।

बता दें, इससे पहले ट्रंप ने अपने बयान में कहा था कि हम दोनों देशों को जानते हैं, जैसे को तैसा वाला रणनीति छोड़कर इस तनाव वाले स्थित को खत्म करना चाहिए हम मदद करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, ऋषि सुनक ने भारत का खुलकर समर्थन दिया था और ऑपरेशन सिंदूर को सही बताया था।

भारत पाकिस्तान टेंशन के बीच मुस्लिम बोर्ड का बयान

इस बीच अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भारत और पाकिस्तान टेंशन के मद्देनजर अपना बयान जारी किया है और कहा है कि दोनों देशों को आपसी बातचीत से मुद्दों को सुलझाना चाहिए क्योंकि युद्ध किसी मुद्दे का समाधान नहीं हो सकता। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक प्रस्ताव में आतंकवाद पर चिंता भी जताई है और कहा है कि वह देश की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले हर कदम का समर्थन करता है।

बोर्ड के पदाधिकारियों द्वारा गुरुवार को एक ऑनलाइन बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में कहा गया, 'ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव को बहुत चिंता के साथ देखता है। यह देश और इसके लोगों की सुरक्षा के लिए उठाए गए हर आवश्यक कदम का समर्थन करता है और इस बात पर जोर देता है कि इस महत्वपूर्ण समय में जनता, राजनीतिक दलों, सशस्त्र बलों और सरकार को इन खतरों का सामना करने के लिए एक साथ आना चाहिए।'

आपको जानकारी के लिए बताते चलें कि बोर्ड ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद और निर्दोष नागरिकों की हत्या गंभीर चिंता का विषय है और इस्लाम के मान्यता प्राप्त सिद्धांतों और मानवीय मूल्यों में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है।

अंत में बोर्ड ने यह भी कहा कि वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ छोटे कार्यक्रम, जैसे साथी नागरिकों के साथ गोलमेज बैठकें, अंतरधार्मिक संवाद, मस्जिदों में खुतबा, जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन प्रस्तुत करना और प्रेस कॉन्फ्रेंस, निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगे।

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