राम मंदिर केस में नेताओं की बढ़ सकती हैं मुश्किलें? वीएचपी ने की बयान दर्ज करने की अपील

Priyanka Gandhi Statement: राम मंदिर मामले में वीएचपी ने जांच अधिकारी को पत्र लिखकर प्रियंका गांधी, अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग की है।
Could politicians face mounting trouble in the Ram Mandir case? VHP appeals for recording of statements.
वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार (सोर्स सोशल मीडिया)
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Ram Mandir Case: विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच कर रहे अधिकारी को पत्र लिखकर कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, राज्यसभा सदस्य संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव समेत अन्य नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग की है।

अधिकारी आशुतोष तिवारी को भेजा पत्र

वीएचपी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस पत्र की जानकारी शेयर करते हुए बताया कि यह पत्र अयोध्या के डीएसपी थाना राम जन्मभूमि के जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी को भेजा गया है। यह एफआईआर राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावे मामले की जांच से जुड़ी हुई है।

पत्र में कहा गया है कि इस मामले को लेकर कई सार्वजनिक हस्तियों ने टीवी चैनलों, सोशल मीडिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन लोगों ने सार्वजनिक रूप से बड़े दावे किए हैं, इसलिए निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए इन लोगों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए।

राम मंदिर में 20,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप

बता दें, कि उनका दावा ये था, कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए 50-50 किलो सोना, चांदी, बहुमूल्य हार और करोड़ों रुपए की नकदी गायब है और इस मामले में सिर्फ छोटे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कई बड़े और प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं।आपको बता दें, कि पत्र में रामगोपाल यादव के उस बयान का जिक्र किया गया है। जिसमें उन्होंने राम मंदिर में करीब 20,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था।

मिली जानकारी के अनुसार अरविंद केजरीवाल के उन बयानों का भी जिक्र किया गया है। बता दें कि जिन बयांनो में केजरीवाल ने आरोप लगाया था। कि भगवान राम का हार, चरण पादुकाएं, हीरे, आभूषण, चांदी की ईंटें, चांदी के दीपक और भारी मात्रा में नकदी चोरी हो गई है। उन्होंने यह भी दावा करते हुए कहा था, कि करीब 200 करोड़ रुपए नकद और कीमती हीरे-जवाहरात गायब हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो सरकार भी गिर सकती है।

राज्यसभा सदस्य संजय सिंह के बयान का जिक्र

हम आपको बता दें, कि इस पत्र में राज्यसभा सदस्य संजय सिंह के बयान का भी जिक्र किया गया है। और कहा गया है कि संजय सिंह ने दावा किया था कि राम मंदिर के दान पात्रों से 200 करोड़ रुपए से अधिक की चोरी हुई है और इसमें 50 से ज्यादा कर्मचारियों की संलिप्तता है। लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या छोटे कर्मचारी अकेले सीसीटीवी बंद कर हजारों करोड़ रुपए के चढ़ावे में हेराफेरी कर सकते हैं या इसके पीछे कुछ बड़े लोगों की मिलीभगत है।

आलोक कुमार ने पत्र के अंत में क्या कहा

आलोक कुमार ने पत्र के अंत में कहते है, कि यदि कोई भी व्यक्ति बिना किसी आधार के जानबूझकर झूठे आरोप लगाता है। जिससे समाज में नफरत फैलने की आशंका हो, तो वह जांच एजेंसी कानून के तहत उचित कार्रवाई पर विचार कर सकती है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि किसी को भी बेबुनियाद आरोप लगाकर बच कर निकलने की अनुमति नहीं दी जा सकती और ऐसे मामलों में कानून अपना काम करेगा।

लेटर में तो यह भी कहा गया है कि यदि ये लोग अपने आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध कराते हैं तो इससे जांच एजेंसी को सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिलेगी। लेकिन यदि जांच में यह सामने आता है कि इतने गंभीर आरोप बिना किसी तथ्य या सबूत के लगाए गए हैं, तो यह भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू होगा।

कौन-कौन से दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मौजूद

पत्र में आलोक कुमार ने कहा कि इन सभी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाए हैं और निश्चित रकम का भी जिक्र किया है। ऐसे में यह माना जा सकता है कि वे मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित हैं, इसलिए जांच एजेंसी को कानून के तहत उन्हें बुलाकर उनके बयान दर्ज करने चाहिए। आलोक कुमार ने जांच अधिकारी से आग्रह किया कि संबंधित नेताओं से यह पूछा जाए कि उनके आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है। उन्हें यह जानकारी कहां से मिली और उनके पास इन दावों के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं।

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