मेडिकल स्टोर्स की हड़ताल! देश भर में आज बंद रहेगी फार्मेसी की दुकानें, जानें कहां मिलेगी दवाएं, क्या है कारण
AIOCD Medical Store Strike: देश भर के मेडिकल स्टोर्स ने आज हड़ताल का ऐलान कर दिया है। AIOCD ने सरकार से इन मांगों को लेकर यह हड़ताल बुलाई है। जानें हड़ताल के दौरान कहां मिलेगी दवाएं।
- Written By: प्रिया जैस
फार्मेसी की दुकानों में हड़ताल (AI Generated Image)
AIOCD Chemists Strike in India: देश भर में मेडिकल स्टोर्स ने आज हड़ताल का ऐलान किया है। देश भर के सभी फार्मासिस्ट, केमिस्ट और दवा डिस्ट्रीब्यूटरों के संगठन ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) इस हड़ताल की अगुवाई कर रही है। लगभग 15 लाख से भी ज्यादा दवा विक्रेत 20 मई, बुधवार को मेडिकल स्टोर्स में ताला लगा रहेगा। मेडिकल स्टोर्स ने सरकार के सामने कुछ मांगे रखी थी, जिसके पूरा होने पर अब मेडिकल स्टोर्स को हड़ताल का सहारा लेना पड़ रहा है।
हाल ही में सरकार ने जीएसआर 220(ई) और जीएसआर 817(ई) को लेकर दो नोटिफिकेशन जारी किए थे। AIOCD का कहना है कि सरकार को तत्काल प्रभाव से इसे वापस लेना चाहिए। उनका कहना है कि इन प्रावधानों की वजह से ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां एक तरह के “कानूनी धुंधले क्षेत्र” में काम कर रही हैं। ऑनलाइन फार्मेसी कंपनी के लिए कोई व्यापक कानून नहीं है, जो यह तय कर सकें कि प्रिस्क्रिप्शन की जांच कैसे होगी, दवाइयां किन नियमों के अंतर्गत दी जाएंगी और नियमों के उल्लंघन पर जवाबदेही कैसे तय होगी।
AIOCD ने सरकार के सामने रखी ये मांग
- ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट संस्था ने सरकार के सामने प्रीडेटरी प्राइसिंग को रोकने की मांग की।
- सरकार ऑनलाइन फार्मेसी और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी की जांच करें और छोटे केमिस्ट दुकानदारों के हितों की रक्षा करें।
- NPPA, DCGI, CCI और राज्य ड्रग कंट्रोलर को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए जाए।
- सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सिस्टम में दवाओं की डुप्लीकेसी न हो पाए।
- बैन की गई दवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होनी चाहिए और डॉक्टरों और केमिस्टों का सही तरीके से रजिस्ट्रेशन होना चाहिए।
- उनकी मांग है कि एक ऐसा क्यूआर कोड सिस्टम बनाया जाए, एक बार जब किसी मरीज के मोबाइल डिवाइस पर कोई प्रिस्क्रिपशन एक्सेस कर लिया जाए, तो उसका दोबारा उपयोग न किया जा सके।
- यह पूरी व्यवस्था निजी के बजाय सरकारी पोर्टल के माध्यम से होनी चाहिए।
- अगर सरकार सुरक्षित सिस्टम लाएगी तो AIOCD पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है।
AIOCD ने जताई आपत्तियां
- AIOCD के महासचिव राजीव सिंघल का दावा है कि ई-फार्मेसियां और इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स गलत या फर्जी प्रिस्क्रिपशन के आधार पर भी दवाएं बेच रहे हैं। ऑनलाइन फार्मेसियों को भी उन्हीं सख्त नियमों के तहत काम करने की आवश्यकता होनी चाहिए जो ऑफलाइन मेडिकल स्टोर पर लागू होते हैं।
- दवा विक्रेता दवाओं की ऑनलाइन बिक्री का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि बाजार में मौजूद फार्मेसियां डॉक्टर के प्रिस्क्रिपशन के आधार पर दवाएं देती हैं; वे प्रतिबंधित दवाएं जैसे एंटीबायोटिक्स, नशीले पदार्थ और प्रेग्नेंसी किट का पूरा रिकॉर्ड रखती हैं, जबकि ई-फार्मेसियां बिना किसी वैध प्रिस्क्रिपशन के ऐसी दवाएं ऑनलाइन बेच रही हैं। इन गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए।
- ऑनलाइन दवा लेनदेन में फर्जी प्रिस्क्रिपशन के इस्तेमाल का भी काफी जोखिम है। हालांकि राष्ट्रीय दवा मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) कई दवाओं की कीमतें तय करता है, लेकिन ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर बाजार को बाधित कर रही हैं।
- रिटेल केमिस्ट आमतौर पर लगभग 16% का मार्जिन कमाते हैं; इसलिए, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा दी जाने वाली भारी छूट देना, सामान्य व्यापारिक मानदंडों के तहत संभव नहीं लगता।
- दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को अभी तक पूरी तरह से कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है, और कई मामलों में नकली तथा प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के आरोप सामने आए हैं। DCGI और कुछ राज्यों ने अतीत में भी ऐसे मामलों में कार्रवाई की है।
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हड़ताल के दौरान कहां मिलेगी दवाएं
आपको जानकारी दें, कि देश भर में 12.5 लाख दवा विक्रेता है। दिल्ली में 15 हजार, बिहार में करीब 40 हजार मेडिकल स्टोर्स हैं। यह सभी दुकानें हड़ताल के दौरान बंद रहेगी। इस दौरान मरीजों को कोई तकलीफ न हो इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। यह हड़ताल 19 मई की रात से 20 मई की रात कर जारी रहेगी।
इस हड़ताल के दौरान, सरकारी अस्पतालों और ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं की आपूर्ति जारी रहेगी। मरीजों की सुविधा के लिए यह सुनिश्चित करने के इंतजाम किए गए हैं कि आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध रहें। इस दौरान, अस्पताल की फार्मेसी, बड़े रिटेल चेन आउटलेट, सहकारी फार्मेसी, मुख्यमंत्री फार्मेसी आउटलेट और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुले रहेंगे।
राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने बताया है कि लगभग 5,000 फार्मेसी सामान्य रूप से काम करेंगी। सहायक निदेशकों की देखरेख में जिला-वार हेल्पलाइन नंबर स्थापित किए गए हैं, और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए औषधि निरीक्षकों को नियुक्त किया गया है।
