इंदिरा की हत्या नहीं होती तो बनता रिकॉर्ड, PM को श्रेय लेने की आदत- अधीर रंजन
PM Modi ने लगातार सबसे लंबे समय तक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री रहने की एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस मामले में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन ने कहा कि प्रधानमंत्री को हर चीज को उपलब्धि बताने की आदत।
- Written By: सौरभ शर्मा
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी (फोटो- सोशल मीडिया)
PM Tenure Record: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए लगातार सबसे लंबे समय तक भारत के प्रधानमंत्री रहने वाले दूसरे व्यक्ति बनने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ दिया। इस उपलब्धि पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस उपलब्धि को रिकॉर्ड के रूप में देखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, “यह सत्ता में रहने की बात है, कोई रिकॉर्ड बनाने का नहीं। इंदिरा गांधी की हत्या नहीं हुई होती तो वह भी लंबे समय तक प्रधानमंत्री रह सकती थी। इसी तरह जवाहरलाल नेहरू का कार्यकाल भी उनके निधन के कारण समाप्त हुआ। अगर ऐसा नहीं होता तो वह भी लंबे समय तक पद पर बने रहते।”
कोई रिकॉर्ड नहीं, बेमतलब का श्रेय लिया जा रहा
अधीर रंजन चौधरी ने आगे कहा, “यह कोई रिकॉर्ड बनाने की बात नहीं है। व्यक्ति की आयु जितनी होती है, वह उतने दिन जीवित रहता है, चाहे वह सत्ता में हो या बाहर। इंदिरा गांधी की हत्या उनके सिख अंगरक्षकों ने की, जिसके कारण उन्हें अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाने का मौका नहीं मिला। जवाहरलाल नेहरू के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनका कार्यकाल अचानक निधन के कारण समाप्त हो गया। इसमें श्रेय लेने की कोई बात नहीं है।”
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आश्चर्य होता है हर चीज को उपलब्धि बना दिया जाता
कांग्रेस नेता ने सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मुझे आश्चर्य हो रहा है कि इसे श्रेय लेने का मुद्दा कैसे बनाया जा रहा है। यह सरकार की आदत बन चुकी है कि हर चीज को उपलब्धि के रूप में पेश किया जाता है, जो ठीक नहीं है।”
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महज संयोग, इन बातों से देश के मुद्दो से ध्यान भटकाया जा रहा
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सत्ता में लंबे समय तक बने रहना कोई असाधारण उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह परिस्थितियों और समय का हिस्सा है। इसे महज एक संयोग के रूप में देखा जाना चाहिए। इस तरह की तुलनाओं से देश का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने की कोशिश है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
