चंबा की 500 मीटर गहरी खाई गिरी कार, चली गई 8 पर्यटकों की जान, बर्फ के चलते हुआ हादसा
Himachal road accident: हिमाचल के चंबा में सच पास मार्ग पर एक कार 500 मीटर गहरी खाई में गिर गई। शुक्रवार रात हुए इस दर्दनाक हादसे में 8 पर्यटकों की जान चली गई है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- AI
Sach Pass Road Accident: शुक्रवार की एक काली रात 8 परिवारों के लिए कभी न खत्म होने वाला मातम लेकर आई, जब चंबा के दुर्गम रास्तों पर एक कार अनियंत्रित होकर मौत की गहरी खाई में समा गई। यह हादसा उन जानलेवा खतरों की एक बड़ी चेतावनी है जो पहाड़ों के संकरे और बर्फ से ढके रास्तों पर हर मोड़ पर हैं।
चंबा जिले का बैरगढ़-सच पास-किलर मार्ग अपनी भौगोलिक जटिलताओं के लिए दुनिया भर में मशहूर है। शुक्रवार की देर रात जब एक कार में सवार आठ पर्यटक बर्फ से ढके इस दुर्गम रास्ते से गुजर रहे थे, तब कुदरत का मिजाज काफी सख्त था। सच पास का यह इलाका अपने बेहद खतरनाक मोड़ों और संकरी सड़कों के लिए जाना जाता है।
बर्फ के चलते बढ़ा फिसलन
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रात के सन्नाटे में दृश्यता यानी विजिबिलिटी बेहद कम थी और सड़क पर जमी बर्फ के कारण फिसलन काफी अधिक हो गई थी। इसी फिसलन और अंधेरे के बीच चालक ने वाहन पर से अपना नियंत्रण खो दिया और कार सीधे 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद उस वाहन के भीतर सवार किसी भी शख्स के बचने की कोई गुंजाइश नहीं रह गई थी।
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14 घंटे बाद मिला सुराग
इस हादसे की विभीषिका का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुर्घटना शुक्रवार रात को हुई, लेकिन इसकी भनक प्रशासन या स्थानीय लोगों को अगले दिन शनिवार दोपहर तक नहीं लग सकी। दरअसल, वह इलाका इतना निर्जन और कठिन है कि रात के समय वहां से वाहनों की आवाजाही लगभग न के बराबर होती है।
शनिवार दोपहर जब कुछ स्थानीय ग्रामीण उस रास्ते से गुजर रहे थे, तब उनकी नजर खाई के नीचे पड़े वाहन के मलबे पर पड़ी। बिखरे हुए पुर्जे और खामोशी चीख-चीख कर उस त्रासदी की कहानी बयां कर रहे थे जो रात के अंधेरे में वहां घटी थी। ग्रामीणों ने तुरंत हिम्मत दिखाई और बिना समय गंवाए स्थानीय प्रशासन को इस दिल दहला देने वाली घटना की सूचना दी।
गहरी खाई के बीच रेस्क्यू टीम की कड़ी जद्दोजहद
सूचना मिलते ही पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें मौके के लिए रवाना हुईं, लेकिन असली चुनौती तो अब सामने आने वाली थी। घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति इतनी दुर्गम थी कि राहत और बचाव कार्य चलाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। खड़ी ढलान, 500 मीटर गहरी खाई और बर्फ की मोटी चादर ने बचाव दल के रास्ते में बड़ी बाधाएं पैदा कीं। इसके अलावा, संचार का कोई साधन न होना एक और बड़ी मुसीबत बन गया।
चुराह क्षेत्र के विधायक ने बताया कि उस इलाके में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप है, जिसके कारण बचाव टीमों के बीच तालमेल बिठाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। शनिवार शाम तक सभी आठ शवों को बरामद नहीं किया जा सका था, जिसके कारण अभियान को रविवार सुबह तक के लिए रोकना पड़ा।
कब थमेगा हादसों का यह सिलसिला
सच पास मार्ग पर हुआ यह हादसा कोई पहली घटना नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, यह सड़क मार्ग पहले भी कई बड़े और दर्दनाक हादसों का गवाह रहा है। विशेष रूप से बर्फबारी के मौसम में यहां का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और आपातकालीन संचार व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि ऐसे संवेदनशील रास्तों पर मौसम की स्थिति को देखते हुए यातायात को पूरी तरह नियंत्रित किया जाना चाहिए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। विशेषज्ञों का भी मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में एक आधुनिक मौसम आधारित सतर्कता प्रणाली और मजबूत मोबाइल नेटवर्क होना अनिवार्य है, ताकि समय रहते मदद पहुंचाई जा सके और मासूम जिंदगियों को बचाया जा सके।
