अल्जाइमर के खतरे को कम करते है योगासन (सौ.सोशल मीडिया)
आजकल तो हर कोई शख्स किसी ना किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नजर आ ही जाता है आज 21 सितंबर को दुनियाभर में विश्व अल्जाइमर दिवस हर साल की तरह इस बार भी मनाया जाएगा। यह दरअसल मस्तिष्क की बड़ी बीमारियों में से एक अल्जाइमर रोग और अन्य डिमेंशिया से संबंधित समस्याओं के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए मनाया जाता है। ताकि लोगों को जानकारी हो तो वह अपने परिवार या किसी व्यक्ति की अल्जाइमर से मदद कर सकें।
अल्जाइमर की समस्या से निकलना इतना आसान तो नहीं है लेकिन इसके लिए जागरूक होने के साथ ही योगासनों को भी शामिल करना चाहिए। अगर आप योगासनों के कुछ प्रकार को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करते है तो, अल्जाइमर रोग के कारणों को कम करने में मदद मिलती है।
यह अल्जाइमर रोग की बीमारी गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकारों में से एक मानी गई है जो मुख्य रूप से वृद्धावस्था में होती है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नष्ट कर देती है, जिससे याददाश्त, सोचने की क्षमता और व्यवहार में गिरावट आने लगती है। दरअसल यह डिमेंशिया का सबसे सामान्य रूप है। इस बीमारी के चपेट में आने वाला मरीज शुरुआत में मरीज छोटी-छोटी चीजें भूलने लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह रोग गंभीर रूप ले लेता है, जिसमें व्यक्ति का दैनिक जीवन कठिन हो जाता है।
आप अपनी दैनिक दिनचर्या में अल्जाइमर रोग से निपटने के लिए इस प्रकार के योगासन कर सकते है, जो इस प्रकार है…
वृक्षासन
वृक्षासन मस्तिष्क की स्थिरता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। यह आसन से संतुलन बनाए रखने और मस्तिष्क के न्यूराॅन कनेक्शन को मजबूत करने में सहायक है। वृक्षासन के अभ्यास के लिए एक पैर पर खड़े होकर दूसरा पैर अपनी जांघ पर रखें और हाथों को ऊपर की ओर जोड़ें। कुछ समय तक इसी मुद्रा में रहें और गहरी सांस लें।
वज्रासन योग
अल्जाइमर की शिकायत में वज्रासन योग के अभ्यास की आदत डालें। वज्रासन के अभ्यास से मन शांत और स्थिर होता है। साथ ही पाचन अम्लता और गैस निर्माण को भी कम करने में फायदेमंद है। इस आसन के नियमित अभ्यास से काफी हद तक अल्जाइमर- डेमेंशिया के खतरे को भी कम किया जा सकता है।
पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन मस्तिष्क को शांति प्रदान करने के साथ ही रक्त प्रवाह को बढ़ाता है। यह आसन मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन पहुंचा कर उसे स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इस आसन के अभ्यास के लिए पैरों को सामने फैलाकर बैठें। अब हाथों से पैरों की ओर झुकें। प्रयास करें नाक घुटनों तक पहुंचे।
शीर्षासन योग
रक्त संचार को बढ़ाने में शीर्षासन का अभ्यास कारगर माना जाता है। इस आसन के अभ्यास से शरीर की समग्र कार्यक्षमता में सुधार करने के लिए यह आसन लाभकारी हैं। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में इस योग के अभ्यास की आदत डालें।