इंसान के नर्वस सिस्टम को हिला देता है रेबीज का वायरस, जानिए इसके संक्रमण से बचाव के उपाय
रेबीज एक प्रकार की जानलेवा बीमारी है जिसका वायरस इंसान के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालता है और बीमारी के लक्षण नजर आने के बाद इलाज ना मिले तो, 100 फीसदी जानलेवा बन जाता है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता प्रदर्शित करने के लिए विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है।
- Written By: दीपिका पाल
विश्व रेबीज दिवस 2024 (सौ.सोशल मीडिया)
World Rabies Day 2024: आज दुनियाभर में रेबीज ( Rabies) बीमारी के रोकथाम और जागरूकता के उद्देश्य से विश्व रेबीज दिवस 2024 मनाया जा रहा है। यह बीमारी एक जानलेवा वायरस की तरह होती है जिसमें किसी संक्रमित जानवर के इंसा को काटने पर फैलती है। आमतौर पर इस बीमारी को कुत्ते के काटने से जोड़कर देखा जाता है। भलें ही यह बीमारी लाइलाज है लेकिन दुनियाभर में करीबन 60 हजार मौतों के साथ रेबीज को लेकर स्वास्थ्य संकट और चिंता का मुद्दा गहराया है।
चलिए जानते हैं रेबीज बीमारी से जुड़ी खास बातें और इसके वायरस से बचने के जरूरी उपाय भी।
जानिए कैसी है बीमारी रेबीज
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, रेबीज एक प्रकार की जानलेवा बीमारी है जिसका वायरस इंसान के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालता है और बीमारी के लक्षण नजर आने के बाद इलाज ना मिले तो, 100 फीसदी जानलेवा बन जाता है। यह गंभीर बीमारी की बात की जाए तो, इसमें शरीर में एक जगह इंफेक्शन होता है और वहां से रेबीज ब्रेन तक तेजी से फैलने लगता है जिससे न्यूरोलॉजिकल डैमेज बढ़ जाता है।
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यह बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित करने स्तनपायी जानवर ही है। इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व रेबीज दिवस हर साल 28 सितंबर को मनाया जाता है। इस साल 2024 में इस दिवस की थीम ब्रेकिंग रेबीज बाउंड्रीज (Breaking Rabies Boundaries) इसका अर्थ है कि, जल्द रेबीज की बीमारी को लेकर किसी प्रकार की सीमाओं का ना रखें इसकी जानकारी रखें।
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जानिए क्या होते है बीमारी के लक्षण
इस रेबीज बीमारी को संक्रामक कहा गया है जिसके अनुसार, व्यक्ति में इसके लक्षण कैसे प्रभावित कर सकते हैं चलिए
बुखार (Fever), सिरदर्द ( headache), दर्द ( pain) घाव की जगह पर चुभन या सरसराहट (tingling at the bite site), कमजोरी ( weakness), थकान (fatigue), agitation, और बेचैनी (anxiety) जैसी समस्याएं शुरूआत लक्षण होते है।
इसके अलावा जैसे वायरस बढ़ता है वैसे ही इसके लक्षण तेज होने लगते हैं इसमें मसल्स में दर्द और अकड़न, पैरालाइज, खाना निगलने औऱ पानी पीने में दिक्कत का होना।
जानिए कैसे फैलता है संक्रमण
यहां पर संक्रामक बीमारी में से एक रेबीज का संक्रमण फैलने के कारण होते है। इसमें रेबीज संक्रमित जानवर की लार, उसकी नाखून की खरोंचो, खुले हुए घाव और उस जानवर द्वारा काटे जाने के कारण फैलने लगता है। वहीं पर इस वायरस का संक्रमण शरीर में प्रवेश कर जाता है। वैसे तो कुत्ते के काटने से जुड़ी बीमारी है लेकिन इस बीमारी का वायरस पालतू कुत्ते, चमगादड़ और रैकून जैसे जानवरों से फैलते हैं। संक्रमित और जंगली जानवरों के सम्पर्क में आने से भी रेबीज फैलता है।
कुत्ता काटे तो तुरंत लें ये प्राथमिक उपचार
अगर अचानक से आपको कुत्ता काट लेता है तो इसके लिए प्राथमिक उपचार लेने की जरूरत होती है जो इस प्रकार है..
1- अगर शरीर के किसी हिस्से में अचानक कुत्ते ने काट लिया है तो सबसे पहले घाव वाली जगह को साबुन और पानी से 15-20 मिनट तक साफ करें। संक्रमण रहने पर जोखिम को कम करने के लिए आप एंटीसेप्टिक सोल्यूशन लगा सकते है।
2- वैसे तो कई मामले में कुत्ते को टीके लगे होते है लेकिन पीड़ित व्यक्ति के वैक्सीनेशन हिस्ट्री का पता करें। रेविज और इम्यूनोग्लोब्यूलिन वैक्सीन्स के अलावा टेटनस का टीका और घाव की सही तरीके से देखभाल करना बहुत जरूरी है।
3-अगर कुत्ते में रेबीज के लक्षण नजर आते है तो तुरंत नगर पालिका या अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों को सूचना देना चाहिए यह सबसे जरूरी का काम है।
4- वैक्सीनेशन या टीकाकरण रेबीज से बचाव का सबसे अच्छा औऱ कारगर उपाय है। सभी कुत्तों, बिल्लियों और पालतू जानवरो को रेबीज का टीका लगवाएं।
5- आवारा कुत्तों को छूने से बचना चाहिए।
