

Monsoon Viral Infection: बारिश का मौसम कई तरह की बीमारियां लेकर आता है। जैसे डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, वायरल फ्लू, इन्फेक्शन, एलर्जी, गैस्ट्रोएंट्राइटिस, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए और ई सरीखी बीमारियां।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की नम और ह्यूमिड परिस्थितियां स्वाइन फ्लू या इन्फ्लूएंजा के फैलने के लिए सही माहौल पैदा करती हैं। इससे सभी उम्र के लोग प्रभावित होते हैं।
स्वाइन फ्लू एक वायरल इंफेक्शन है। ये इंफ्लूएंज़ा A वायरस के सबटाइप H1N1 की वजह से होता है। स्वाइन फ्लू सांस से जुड़ी एक संक्रामक बीमारी है, जो खासतौर पर नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करती है।
स्वाइन फ्लू का वायरस हवा के जरिए फैलता है। जब इस वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो उसके मुंह और नाक से निकलने वाली छोटी-छोटी बूंदों के ज़रिए वायरस हवा में फैल जाता है। अगर कोई दूसरा व्यक्ति इन्हें सांस के साथ अंदर ले लें, तो उसे स्वाइन फ्लू हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या वायरस से दूषित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से भी स्वाइन फ्लू हो सकता है।
इसके लक्षण आमतौर पर 1 से 4 दिन में दिखने लगते हैं। बीमारी के लक्षण दिखने के एक दिन पहले से लेकर अगले 3-4 दिनों तक व्यक्ति इस वायरस को फैला सकता है। स्वाइन फ्लू के आम लक्षण हैं- तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, शरीर में दर्द, सिरदर्द, थकान और कमजोरी। गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत, उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं।
स्वाइन फ्लू, कुछ मामलों में गंभीर और जानलेवा हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं और करीब हफ्ते भर में मरीज ठीक हो जाते हैं। लेकिन कभी-कभार, खासकर कमजोर इम्यूनिटी वालों, बच्चों, बुजुर्गों या बीमार लोगों में ये गंभीर हो सकता है और साथ ही कई जटिलताएं पैदा कर सकता है।
स्वाइन फ्लू के इलाज में एंटी वायरल दवा दी जाती हैं। इसमें खूब आराम करने की सलाह दी जाती है। ORS जैसे तरल पदार्थ का सेवन बढ़ा दिया जाता है।