केवल कैंसर ही नहीं इन स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने के लिए जरुरी हैं रेडियोग्राफी, जानिए
दुनिया में कैंसर जैसी बढ़ी बीमारी की स्थिति का पता लगाने के लिए भी रेडियोग्राफी तकनीक को अपनाया जाता है। इसमें जांच के आधार पर ही रेडियोलॉजिस्ट मरीज के इलाज की प्रक्रिया को तय कर पाते है।
- Written By: दीपिका पाल
किन बीमारियों के लिए जरूरी रेडियोग्राफी (सौ.सोशल मीडिया)
World Radiography Day 2024: आज दुनियाभर में रेडियोग्राफी को बढ़ावा देने के लिए 8 नवंबर को विश्व रेडियोग्राफी के तौर पर मनाया जाता है। यह वह तकनीक है जो गंभीर से गंभीर बीमारी का बारीकी से पता लगता ही है। दुनिया में कैंसर जैसी बढ़ी बीमारी की स्थिति का पता लगाने के लिए भी रेडियोग्राफी तकनीक को अपनाया जाता है। इसमें जांच के आधार पर ही रेडियोलॉजिस्ट मरीज के इलाज की प्रक्रिया को तय कर पाते है। इसकी जांच में अगर स्थिति ज्यादा गंभीर पाई जाती है तो, बायोप्सी या फिर कोई औऱ तरीका इलाज का अपनाया जाता है। जांच के आधार पर ही दवा कौन सी लिखनी है इसे तय करते है।
कैसे काम करती है रेडियोग्राफी
यहां पर मरीज के इलाज के दौरान गंभीर बीमारी का पता लगाने के लिए रेडियोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल करते है। यहां पर इस तकनीक के जरिए बीमारी कितनी गंभीर है और इसका पता लगाकर इलाज संभंव कराया जाता है। इस बीमारी में रोग का पता लगाने, स्टेजिंग और उपचार के लिए उपकरणों और तकनीकों का इलाज विस्तृत रूप से किया जाता है। इसके अलावा डायग्नोस्टिक इमेजिंग संरचनात्मक या रोग संबंधी परिवर्तनों के बारे में रेडियोग्राफी कार्य करती है जहां जानकारी के आधार पर निदान खोजा जाता है।
इन बीमारियों का पता लगाती है रेडियोग्राफी
कैंसर: यहां पर इस तकनीक के जरिए गंभीर बीमारी के खतरे को पता लगाने के लिए एक्स-रे से कुछ ट्यूमर और अन्य असामान्य द्रव्यमान का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
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हड्डियों के फ्रैक्चर: यहां पर इस तकनीक के जरिए एक्स-रे से टूटी हुई हड्डियों, अव्यवस्थित जोड़ों और हड्डियों, जोड़ों या कोमल सेल्स-टिश्यूज में अन्य संरचनात्मक समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।
दांतों की समस्याएं: यहां पर इस रेडियोग्राफी तकनीक के जरिए एक्स-रे से दांतों की सड़न, ढीले दांत और दांतों के फोड़े की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
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फेफड़ों की समस्याएं: यहां पर इस रेडियोग्राफी तकनीक के जरिए एक्स-रे से निमोनिया, फेफड़ों के कैंसर और फेफड़ों की अन्य समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
दूसरी तरह की चोटें: यहां पर इस रेडियोग्राफी तकनीक के जरिए एक्स-रे से कुछ प्रकार की चोटों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जैसे स्कोलियोसिस (रीढ़ की असामान्य वक्रता)
विदेशी वस्तुएं: यहां पर इस रेडियोग्राफी तकनीक के जरिए एक्स-रे से शरीर में विदेशी वस्तुओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
निगलने की समस्याएं: यहां पर इस रेडियोग्राफी तकनीक के जरिए एक्स-रे से डिस्फेगिया (निगलने की समस्याएं) की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
