

Peri Menopause Symptoms: मेनोपॉज के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। मेनोपॉज से पहले पेरिमेनोपॉज के क्षण दिखने लगते हैं। इस दौरान हॉट फ्लैशेज, नींद की समस्या और योनि में सूखापन जैसे लक्षण अधिक महसूस होते हैं। जानिए मेनोपॉज के लक्षण कितने समय तक रह सकते हैं और किन आदतों की वजह से यह बढ़ सकता है।
मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक सामान्य बायोल़जिकल प्रोसेस है। हालांकि, मेनोपॉज तक पहुंचने से पहले शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं। इस चरण को पेरिमेनोपॉज कहा जाता है। इस दौरान पीरियड्स में बदलाव होते हैं और इसके साथ ही हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना, नींद की परेशानी, मूड में बदलाव और योनि में सूखापन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
इन लक्षणों की अवधि और तीव्रता हर महिला में अलग हो सकती है। कुछ महिलाओं में कुछ समय के बाद लक्षण कम दिखने लगते हैं, जबकि कुछ में मेनोपॉज के बाद भी ये लक्षण कई वर्षों तक बने रह सकते हैं।
पेरिमेनोपॉज औसतन करीब 4 साल तक रह सकता है, जो कि लगभग 2 से 8 साल तक हो सकती है। इसी दौरान मेनोपॉज से जुड़े कई सामान्य लक्षण सबसे ज्यादा महसूस किए जाते हैं। मेनोपॉज की चिकित्सकीय परिभाषा के अनुसार, जब किसी महिला को लगातार 12 महीने तक पीरियड्स नहीं आते, तो उसे मेनोपॉज माना जाता है।
कुछ महिलाओं में मेनोपॉज तक पहुंचने के बाद लक्षण पूरी तरह खत्म हो सकते हैं। वहीं, कुछ लक्षण पोस्टमेनोपॉज यानी मेनोपॉज के बाद भी बने रह सकते हैं।
हॉट फ्लैशेज और रात में पसीना आना को Vasomotor Symptoms (VMS) कहा जाता हैं। शोध के अनुसार, इन लक्षणों की अवधि काफी लंबी हो सकती है। एक रिसर्च के अनुसार, VMS औसतन करीब 7 साल तक रह सकते हैं और कुछ महिलाओं में ये 10 साल से भी अधिक समय तक जारी रह सकते हैं। इसलिए मेनोपॉज के लक्षणों के लिए कोई एक निश्चित समय बताना संभव नहीं है।
मेनोपॉज के बाद भी कुछ महिलाओं को लक्षणों का अनुभव हो सकता है। इनमें खास तौर पर योनि में सूखापन शामिल है। वहीं, ध्यान और याददाश्त जैसी मस्तिष्क से जुड़ी कुछ परेशानियां पोस्टमेनोपॉज में कम हो जाती हैं। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ होने वाले सामान्य बदलाव अलग विषय हैं और उन्हें केवल मेनोपॉज से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है।
शराब का सेवन
धूम्रपान
मोटापा
शारीरिक गतिविधि की कमी
ज्यादा भावनात्मक तनाव
इसलिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करना महत्वपूर्ण हो सकता है।
किन चीजों से हॉट फ्लैशेज ट्रिगर होते हैं, उन्हें पहचानें और उनसे बचें।
कमरे में पंखे या कूलिंग की व्यवस्था रखें।
बाहर जाते समय छोटा पोर्टेबल फैन रख सकती हैं।
गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज करें।
जरूरत के अनुसार लेयर वाले कपड़े पहनें।
ठंडा पानी साथ रखें।
मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण योनि में सूखापन की समस्या हो सकती है। इसके लिए वॉटर बेस्ड लुब्रिकेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा कई प्रकार के मॉइश्चराइजर भी बाजार में उपलब्ध है, जिसे डॉक्टर की सलाह से इस्तेमाल करना चाहिए।
मेनोपॉज के दौरान अनिद्रा या नींद बार-बार टूटने की समस्या हो सकती है। बेहतर नींद के लिए:
दोपहर के बाद कॉफी और कैफीन का सेवन कम करें।
रात में बहुत ज्यादा खाना न खाएं।
दिन में लंबी झपकी लेने से बचें। जरूरत हो तो झपकी करीब 20 मिनट तक सीमित रखें।
सोने के करीब शराब का सेवन और बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने से बचें।
रोज सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखने की कोशिश करें।
बेडरूम को ठंडा, शांत और अंधेरा रखें।
तनाव कम करने के लिए रिलैक्सेशन या डीप ब्रीदिंग जैसी तकनीक अपनाएं।
कुछ महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर हार्मोन थेरेपी की भी सलाह देते हैं। इसे हार्मोन थेरेपी भी कहा जाता है। यह कुछ महिलाओं में मेनोपॉज के शारीरिक लक्षणों से राहत दिलाता है, हड्डियों के नुकसान को धीमा करता है और मूड स्विंग में भी मदद करता है।
हालांकि, हार्मोन थेरेपी हर महिला के लिए उपयुक्त नहीं होती। इसके कुछ संभावित साइड इफेक्ट्स में योनि से रक्तस्राव, पेट फूलना, स्तनों में सूजन या दर्द, सिरदर्द, मूड में बदलाव और मतली जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं।
मेनोपॉज के दौरान पीरियड्स में बदलाव सामान्य हो सकते हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। डॉक्टर से संपर्क करें अगर
अचानक बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो।
पीरियड्स में बहुत ज्यादा या बड़े रक्त के थक्के आएं।
पीरियड सामान्य से ज्यादा दिनों तक चले।
सेक्स के बाद स्पॉटिंग या ब्लीडिंग हो।
पीरियड खत्म होने के बाद दोबारा ब्लीडिंग हो।
बहुत कम अंतराल पर बार-बार पीरियड आएं।
मेनोपॉज के लक्षण रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को प्रभावित करने लगें।