Explainer: Hantavirus क्या है? कैसे हुई इसकी शुरुआत और क्या होते हैं लक्षण? जानें कुछ महत्वपूर्ण बातें
Hantavirus Symptoms And Causes: हंतावायरस एक खतरनाक रोग है जो चूहों से फैलता है। जानें हंतावायरस के लक्षण, शुरुआत और बचाव के तरीके ताकि आपको और आपके परिवार को सुरक्षित रहने में मदद मिल सके।
- Written By: प्रिया सिंह
हंतावायरस (सोर्स-सोशल मीडिया)
Hantavirus Guide, Symptoms And Treatment For Hantavirus Infection: अर्जेंटीना से निकले एक मशहूर डच जहाज एमवी होंडियस पर अचानक हंतावायरस ने भयानक कहर बरपाया है। इस जानलेवा बीमारी के कारण अब तक जहाज पर सवार तीन विदेशी यात्रियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इस चौंकाने वाली घटना के बाद से पूरी दुनिया के स्वास्थ्य विभाग और वैज्ञानिक हाई अलर्ट पर आ गए हैं। आइये जानते हैं इस वायरस के बारे में कुछ जरूरी बातें। हंतावायरस एक गंभीर रोग है जो मुख्य रूप से चूहों माध्यम से फैलता है। यह वायरस संक्रमित जानवरों के मल-मूत्र या लार के सीधे संपर्क में आने से इंसानों में प्रवेश करता है।
इसकी पहचान सबसे पहले कोरिया में हुई थी और अब यह दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पाया जाता है। यह बीमारी जानलेवा हो सकती है इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर इलाज लेना बहुत जरूरी है। हंतावायरस का संक्रमण फेफड़ों और गुर्दों पर सीधा असर डालता है जिससे सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगती है। साफ-सफाई रखकर और चूहों से दूरी बनाकर ही इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।
कैसे हुई हंतावायरस की शुरुआत?
हंतावायरस की खोज आधिकारिक तौर पर 1970 के दशक के अंत में दक्षिण कोरिया की हंतन नदी के पास हुई थी। डॉ. हो वांग ली ने सबसे पहले इस खतरनाक वायरस को चूहों के भीतर पहचान कर दुनिया को बताया था। तब से इसे हंतावायरस के नाम से जाना जाता है और इसके कई अलग-अलग स्ट्रेन खोजे जा चुके हैं।
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यह वायरस मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में पाया जाता है जहां खेती और जंगली चूहों की संख्या अधिक होती है। शुरुआत में इसे केवल एक क्षेत्रीय बीमारी माना जाता था लेकिन बाद में यह वैश्विक चिंता का विषय बन गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह वायरस चूहों की विशिष्ट प्रजातियों में ही जीवित रहता है।
हंतावायरस के संक्रमण के कारण
हंतावायरस का संक्रमण तब फैलता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित चूहे के मूत्र या लार के संपर्क में आता है। हवा में मौजूद वायरस के कणों को सांस के जरिए अंदर लेने से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आमतौर पर नहीं फैलता है। घर में रखे पुराने सामान या गोदामों की सफाई करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि वहां चूहे हो सकते हैं। धूल झाड़ते समय वायरस के सूक्ष्म कण हवा में मिल जाते हैं जो फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। खुले घावों या आंखों के जरिए भी यह संक्रमण मानव शरीर में प्रवेश कर सकता है।
क्या हैं हंतावायरस के मुख्य लक्षण?
हंतावायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू या बुखार की तरह ही महसूस होते हैं जिससे लोग भ्रमित हो जाते हैं। संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक थकान महसूस होने लगती है जो कई दिनों तक बनी रहती है। कुछ रोगियों को सिरदर्द, चक्कर आना और पेट में तेज दर्द की शिकायत भी होती है। संक्रमण बढ़ने पर सांस लेने में गंभीर समस्या होने लगती है जिसे हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) कहा जाता है। फेफड़ों में पानी जमा होने के कारण ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरने लगता है जो जानलेवा साबित होता है। अगर बुखार के साथ सांस फूलने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत आवश्यक है।
हंतावायरस से बचाव के उपाय
इस वायरस से बचने का सबसे प्रभावी तरीका अपने घर और कार्यस्थल को चूहों से पूरी तरह मुक्त रखना है। खाने को हमेशा ढककर रखें और चूहों के प्रवेश द्वारों को लोहे की जाली या सीमेंट से बंद कर दें। सफाई करते समय मास्क और दस्ताने पहनना संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है। जिन जगहों पर चूहों के होने का संदेह हो वहां ब्लीच या कीटाणुनाशक का छिड़काव करना बहुत ही फायदेमंद होता है। घर के आसपास कूड़ा-कचरा जमा न होने दें क्योंकि यह चूहों को आकर्षित करने का मुख्य कारण बनता है। जागरूकता और स्वच्छता ही इस लाइलाज समझे जाने वाले वायरस के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
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संक्रमण के बाद कैसे करें इलाज और देखभाल?
हंतावायरस के लिए वर्तमान में कोई विशिष्ट टीका या एंटी-वायरल दवा उपलब्ध नहीं है जो इसे पूरी तरह ठीक करे। अस्पताल में मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट और इंटेंसिव केयर (ICU) के जरिए जीवित रहने में मदद दी जाती है। जितनी जल्दी मरीज को चिकित्सा सहायता मिलती है उसके ठीक होने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।
डॉक्टर शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन को बनाए रखने और ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। संक्रमण के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना भी रिकवरी में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। हेल्दी लाइफस्टाइल और हेल्दी खाना इस बीमारी से लड़ने की शारीरिक शक्ति प्रदान करते हैं।
