क्या अब टल जाएगा देश में ऊर्जा संकट? कतर से 110 दिन बाद LNG लेकर ‘दहेज’ पहुंची ‘दिशा’

LNG Tanker Disha: कतर से 62,370 मीट्रिक टन LNG लेकर टैंकर 'दिशा' गुजरात के दहेज टर्मिनल पहुंच गया है। 110 दिनों के लंबे इंतजार के बाद भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह एक बड़ी आर्थिक कामयाबी है।
Will the country's energy crisis be averted now? 'Disha' arrives at Dahej with LNG from Qatar after 110 days.
LNG लेकर दहेज पहुंची दिशा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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LNG Tanker Disha Dahej Port: मिडिल ईस्ट संकट के बीच कतर से भारत के लिए एलएनजी की आपूर्ति करीब 110 दिनों के लंबे अंतराल के बाद फिर बहाल हो गई है। कतर से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) लेकर चला विशाल टैंकर 'दिशा' गुजरात के भरूच स्थित दाहेज एलएनजी टर्मिनल पर सफलतापूर्वक पहुंच गया है।

होर्मुज पार कर पहुंचा भारत

62,370 मीट्रिक टन गैस से लदा यह जहाज रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को पार करके भारत पहुंचा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण यह रास्ता वाणिज्यिक जहाजों के लिए बेहद खतरनाक हो गया था। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते के बाद समुद्री स्थितियों में सुधार हुआ, जिसका फायदा उठाते हुए 'दिशा' ने इस रास्ते को सुरक्षित पार किया।

110 दिनों का लंबा इंतजार खत्म

भारत की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक कंपनी 'पेट्रोनेट एलएनजी' को तीन महीने से अधिक समय तक इस खेप का इंतजार करना पड़ा। रिकॉर्ड के अनुसार, 'दिशा' ही वह आखिरी टैंकर था जिसने 1 मार्च 2026 को कतर से आई लॉन्ग-टर्म एलएनजी की खेप दहेज टर्मिनल पर उतारी थी।

इसके बाद मार्च, अप्रैल और मई के दौरान अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के कारण कतर से आने वाले जहाजों की आवाजाही पूरी तरह थम गई थी। यह 110 दिनों का अंतराल भारत के लिए चिंता का विषय था क्योंकि कतर भारत का सबसे महत्वपूर्ण एलएनजी आपूर्तिकर्ता है।

ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक क्षेत्र को मजबूती

यह सफल आपूर्ति 'कतर एनर्जी' और 'पेट्रोनेट एलएनजी' के बीच हुए दीर्घकालिक अनुबंध का हिस्सा है। माल्टा के झंडे वाले इस टैंकर का संचालन 'शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' (SCI) के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम द्वारा किया जा रहा है। बता दें कि दहेज टर्मिनल कि वार्षिक क्षमता 22.5 मिलियन टन है और इस खेप का पहुंचना देश के औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्रों के लिए एक बड़े 'बूस्ट' के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति पर मंडरा रहे संकट के बीच इस आपूर्ति का बहाल होना यह दर्शाता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर सक्रिय है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में कतर से एलएनजी की आपूर्ति नियमित रूप से जारी रहेगी, जिससे देश में बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों को निर्बाध ईंधन मिलता रहेगा।

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