औरंगजेब मामला थमा तो सूरत की 600 साल पुरानी ईदगाह का विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, दोनों पक्ष के वकील भिड़े
गुजरात हाईकोर्ट में सूरत की 600 साल पुरानी ईदगाह को लेकर एक विवाद की सुनवाई शुरू हुई है। इस दौरान ही पक्ष और विपक्ष के वकील आपस में भिड़ गए जिसके अगली सुनवाई की तारीख दे दी गई।
- Written By: यतीश श्रीवास्तव
इलाहाबाद हाईकोर्ट का भड़काऊ पोस्ट को लेकर फैसला
अहमदाबाद : महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र का विवाद कुछ थमा तो गुजरात के सूरत में 600 साल पुरानी ईदगाह का विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में पुरानी ईदगाह की जमीन को गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड को ट्रांसफर किए जाने के खिलाफ समुदाय विशेष की ओर से याचिका दाखिल की गई है। मामले में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए अगली तारीख 26 मार्च तय कर दी है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सुनवाई की अगली तारीख को लेकर कहा कि 2 अप्रैल को ईद है और इस दौरान काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग ईदगाह में एकत्र होंगे। ऐसे में सुनवाई की तारीख ईद के बाद की रखी जाए। जीईटीसीएल के कर्मचारी वहीं पर काम भी कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि ईदगाह के आसपास परिसर में पर्याप्त जगह है। ऐसे में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
मुस्लिम सुमादाय के अधिवक्ता ने कोर्ट में रखा पक्ष
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि यह ईदगाह 600 साल पुरानी है। यह प्रदेश की प्रमुख धार्मिक इमारतों में से एक है। ऐसे में इसे किसी भी हाल में नुकसान पहुंचाना गलत होगा। इससे संप्रदाय विशेष की धार्मिक भावनाएं भी आहत होंगी।
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कोर्ट में भिड़ गए दोनों पक्षों के वकील
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि सरकारी वकील मामले को अलग रंग दे रहे हैं। इस पर सरकारी वकील भड़क गए। दोनों तरफ के वकीलों में बहस होने लगी। इस पर हाईकोर्ट ने बीच में ही दोनों को रोका और कहा कि आप लोग शांत रहिए। अभी मामले का निर्णय नहीं आया है। प्रकरण कोर्ट में लंबित है। जब तक दोनों पक्षों की बातें पूरी नहीं सुनी जाएगी कोई फैसला नहीं सुनाया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी इमारत को बेवजह नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। जो भी निर्माण कार्य हो रहा है, वह जरूरी है तो सुरक्षित तरीके से होगा।
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याचिका पर ये बोले सरकारी वकील
मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि याचिका में कहा गया है कि निर्माण कार्य में अव्यवस्था से ईमारत को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक मामले को धार्मिक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत नहीं है। इसे सामान्य तौर पर लिया जाना चाहिए।
