गुजरात के उद्योगों पर संकट(Image- Social Media)
Gujarat Industry Crisis 2026: भारत का औद्योगिक पावरहाउस कहे जाने वाले गुजरात के कारखानों से इन दिनों मशीनों के शोर के बजाय सन्नाटे की खबरें आ रही हैं। राज्य की सवा चार लाख पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों में से करीब 28,000 से अधिक इकाइयां वर्तमान में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। दुनिया के सिरेमिक हब ‘मोरबी’ से लेकर कपड़ों की राजधानी ‘सूरत’ तक, सप्लाई चेन में आई बाधाओं और कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों ने उत्पादन पर ब्रेक लगा दिया है।
जहां एक ओर मोरबी की 450 से ज्यादा फैक्ट्रियों में ताले लटक गए हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार इसे महज एक ‘व्यावहारिक बाधा’ बताकर स्थिति जल्द सामान्य होने का दावा कर रही है। क्या गुजरात का यह औद्योगिक संकट देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर डालेगा? आइए जानते हैं क्या हैं जमीनी हालात और सरकार के राहत उपाय।
भारत के सबसे बड़े औद्योगिक हब गुजरात से चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। राज्य की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात की 4,11,733 पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों में से 1,212 इकाइयां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं, जबकि 28,517 इकाइयां अपनी क्षमता से काफी कम पर काम कर रही हैं।
संकट का सबसे गहरा असर दुनिया के प्रसिद्ध सिरेमिक हब मोरबी में देखने को मिल रहा है। यहाँ लगभग 670 फैक्ट्रियों में से 450 ने कामकाज बंद कर दिया है। इसी तरह, सूरत का टेक्सटाइल उद्योग भी कच्चे माल की कीमतों और श्रमिकों की कमी से जूझ रहा है। जेतपुर और अहमदाबाद के केमिकल सेक्टर में भी उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
हालांकि, राज्य सरकार ने इन खबरों को ऊर्जा संकट से जोड़ने से साफ इनकार किया है। उद्योग आयुक्त के.सी. संपत ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति बिजली की कमी के कारण नहीं, बल्कि मुख्य रूप से लॉजिस्टिक्स, परिवहन और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आई बाधाओं की वजह से है। सरकार का दावा है कि बड़े पैमाने पर छंटनी जैसी कोई स्थिति नहीं है और पलायन की खबरें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही हैं।
गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (GCCI) के अध्यक्ष संदीप इंजीनियर ने बताया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और शिपिंग लागत में उछाल ने उद्योगों की कमर तोड़ दी है। विशेषकर उन उद्योगों पर ज्यादा असर पड़ा है जो कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हैं।
इंडस्ट्री को फिर से पटरी पर लाने के लिए सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किए हैं:
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सरकार स्थिति नियंत्रण में होने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि औद्योगिक गतिविधियों को सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा। यदि सप्लाई चेन की समस्याएं जल्द हल नहीं हुईं, तो इसका असर राज्य के राजस्व और रोजगार पर पड़ना तय है।