

Vinod Khanna Spiritual Journey: हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसे बहुत कम स्टार्स हुए हैं जिन्होंने लीक से हटकर अपनी पहचान बनाई। विनोद खन्ना एक ऐसा ही नाम थे, जिन्होंने पर्दे पर खलनायक का रोल निभाकर भी दर्शकों का दिल जीता। आमतौर पर किसी भी नए एक्टर के लिए नेगेटिव भूमिका से करियर की शुरुआत करना जोखिम भरा माना जाता था।
हालांकि विनोद खन्ना ने इसी जोखिम को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। अपनी दमदार एक्टिंग और खास अंदाज के बल पर उन्होंने विलेन के रूप में भी अपनी एक अलग और मजबूत पहचान स्थापित की।
साल 1968 में आई फिल्म 'मन का मीत' से उन्होंने अपने एक्टिंग सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद साल 1971 में रिलीज़ हुई फिल्म 'मेरे अपने' से उन्हें बतौर मुख्य विनोद खन्ना को पहला बड़ा ब्रेक मिला। इसके बाद तो 'मेरा गांव मेरा देश', 'अमर अकबर एंथनी', 'दयावान' और 'कुर्बानी' जैसी एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्मों के जरिए वह सफलता के नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए।
उस दौर में उन्होंने सुनील दत्त, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी को 'मुकद्दर का सिकंदर' और 'अमर अकबर एंथनी' जैसी फिल्मों में बेहद पसंद किया गया। 80 के दशक की शुरुआत तक वह इंडस्ट्री के सबसे महंगे एक्टर्स की लिस्ट में शामिल हो चुके थे।
जब उनका फिल्मी करियर अपने सबसे टॉप पर था, तब उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसने पूरे बॉलीवुड को हैरान कर दिया। साल 1982 में विनोद खन्ना ने ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कह दिया और आध्यात्मिक गुरु ओशो की शरण में चले गए। लगभग 5 सालों तक उन्होंने शांति और अध्यात्म के रास्ते पर समय बिताया।
इसके बाद साल 1987 में फिल्म 'इंसाफ' से उन्होंने बड़े पर्दे पर दोबारा वापसी की। लंबे समय तक फिल्मों से दूर रहने के बावजूद दर्शकों ने उनकी वापसी का गर्मजोशी से वेलकम किया। हिंदी सिनेमा में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
जिंदगी के आखिरी पड़ाव में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ते हुए 27 अप्रैल 2017 को उनका निधन हो गया। साल 2020 में आई फिल्म 'गन्स ऑफ बनारस' में विनोद खन्ना को आखिरी बार पर्दे पर देखा गया था।
विनोद खन्ना के पारिवारिक जीवन की बात करें तो उनके दो बेटे राहुल खन्ना और अक्षय खन्ना भी एक्टिंग जगत का जाना-माना नाम हैं। खलनायक से नायक और फिर एक संन्यासी का जीवन जीने वाले विनोद खन्ना आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में उनका योगदान और उनकी फिल्में हमेशा दर्शकों के दिलों में जिंदा रहेंगी।