सोनल मानसिंह (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
मुंबई: भारत की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व मंच पर सम्मान दिलाने वालीं सुप्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना डॉ. सोनल मान सिंह आज भी कला की दुनिया में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। वहीं सोनल हर साल 30 अप्रैल को अपना जन्मदिन मनाती हैं। दरअसल, उनका जन्म 30 अप्रैल 1944 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने ओडिसी और भरतनाट्यम जैसे शास्त्रीय नृत्यों में कई उपलब्धि हासिल की है। ऐसे में चलिए इस खास मौके पर जानते हैं उनके जीवन की कुछ अनसुनी बातें।
सोनल मान सिंह ने महज चार साल की उम्र में मणिपुरी नृत्य से अपनी कला यात्रा की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने भरतनाट्यम की विधिवत शिक्षा ली और फिर ओडिसी को भी अपना लिया। डॉ. सिंह की खास बात ये है कि उन्होंने सिर्फ नृत्य को ही नहीं अपनाया, बल्कि इसके जरिए सामाजिक, सांस्कृतिक और स्त्री अधिकारों जैसे विषयों को भी मंच पर लाया।
सोनल को मिल चुका है पद्म भूषण का सम्मान
उन्होंने कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए पद्म भूषण (1992) और पद्म विभूषण (2003) जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त किए हैं। वह भारत की पहली महिला कलाकार थीं जिन्हें सांसद (राज्यसभा सदस्य) के रूप में भी मनोनीत किया गया।
डॉ. सोनल मान सिंह ने ‘Centre for Indian Classical Dances’ (CICD) की स्थापना की, जो आज भी शास्त्रीय नृत्य की नई पीढ़ी को प्रशिक्षित कर रहा है। उनके नृत्य नाटकों में ‘गीत गोविंद’, ‘पंचकन्या’, ‘शक्तिरूपा’ जैसे पौराणिक विषयों के साथ-साथ ‘अस्तित्व’, ‘मनसी’ जैसे आधुनिक और सामाजिक विषय भी प्रमुख हैं।
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देश-विदेश में भी करती हैं वर्कशॉप
उनकी कला सिर्फ एक मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि भारतीय संस्कृति और नारी चेतना की आवाज बनी। वह आज भी देश-विदेश में नृत्य प्रदर्शन के साथ-साथ लेक्चर और वर्कशॉप के जरिए लोगों को भारतीय कला के प्रति जागरूक कर रही हैं।
अपने जीवन और साधना से सोनल मान सिंह ने साबित किया कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य केवल मंच की शोभा नहीं, बल्कि यह आत्मा की अभिव्यक्ति और समाज में बदलाव लाने का माध्यम भी है। उनके जन्मदिन पर पूरा देश इस महान कलाकार को सलाम करता है।