शाहरुख खान का 33 साल का करियर में इतिहास
मुंबई: शाहरुख खान का नाम भारत से लेकर ब्राजील, पेरिस, काहिरा और मेलबर्न तक गूंजता है। उन्होंने आज इंडस्ट्री में अपने 33 साल पूरे कर लिए हैं। एक अभिनेता के रूप में उनकी यात्रा सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनका प्रभाव समाज, संस्कृति और मानवता पर भी स्पष्ट रूप से दिखता है। उनके सम्मान की सूची इतनी लंबी है कि दुनिया के सातों महाद्वीपों में उन्हें बड़े-बड़े पुरस्कार मिल चुके हैं।
एशिया में, उन्हें भारत सरकार की ओर से 2005 में पद्मश्री से नवाजा गया, जो भारतीय सिनेमा में उनके योगदान का सम्मान था। यूरोप में, उन्हें स्विट्जरलैंड के लोकार्नो फिल्म फेस्टिवल में ‘पार्दो आला कारिएरा’ से सम्मानित किया गया, जबकि फ्रांस सरकार ने उन्हें 2007 में ‘ऑर्ड्रे दे आर्त ए दे लेत्र’ और 2014 में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘लीजन ऑफ ऑनर’ दिया।
नॉर्थ अमेरिका में, उन्होंने IIFA 2011 में ‘माई नेम इज खान’ के लिए बेस्ट एक्टर अवॉर्ड जीता और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से क्रिस्टल अवॉर्ड पाया। ऑस्ट्रेलिया में, उन्हें ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने ऑनरेरी डॉक्टरेट ऑफ लेटर्स से नवाजा। अफ्रीका में, उन्हें 2011 में UNESCO का पिरामिड कॉन मार्नी अवॉर्ड मिला, जो मानवता की सेवा में दिए जाने वाला एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है।
साउथ अमेरिका और ब्रिटेन में, उन्हें ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में ग्लोबल डाइवर्सिटी अवॉर्ड दिया गया। अंटार्कटिका का जिक्र सीधे तौर पर न होते हुए भी, शाहरुख खान की फिल्मों और उनके नाम को वहां मौजूद रिसर्च सेंटरों तक देखा-सुना जाता है, जिससे ये कहा जा सकता है कि वहां भी उनका असर मौजूद है। इन सम्मानों से शाहरुख खान के मीर फाउंडेशन ने समाज सेवा में एक गहरी छाप छोड़ी है।
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शाहरुख खान की ये तमाम कामयाबियां ये दिखाती हैं कि वो सिर्फ एक एक्टर नहीं, बल्कि एक सोच, एक इंस्पिरेशन हैं। फिल्मों से लेकर समाजसेवा तक और अपनी सादगी से लोगों के दिलों में जगह बनाने तक, वो हर जगह मिसाल बन चुके हैं। किंग खान की ये यात्रा सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी है। अभिनय, विनम्रता और इंसानियत का ये चेहरा आने वाले वर्षों में भी करोड़ों दिलों पर राज करता रहेगा।