Sanjay Dutt Birthday: स्टारडम के बीच मौत के बेहद करीब पहुंच गए थे संजय दत्त, फिर एक घटना ने बदल दी पूरी कहानी

Sanjay Dutt Life Story: संजय दत्त की जिंदगी में एक ऐसा दौर आया था जब नशे की लत के कारण उन्हें अपनी जान जाने का डर सताने लगा। घर के नौकर के आंसुओं ने उन्हें अपनी हालत का एहसास कराया।
Sanjay Dutt Birthday Sepcial Drug Addiction Life Story
संजय दत्त (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Sanjay Dutt Birthday Special Story: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त आज अपना 67वां जन्मदिन मना रही हैं। संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को मुंबई में हुआ था। संजय दत्त दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस दत्त के बेटे हैं। बचपन से ही उनका रिश्ता फिल्मों से रहा। उन्होंने 1971 में फिल्म 'रेशमा और शेरा' में बतौर बाल कलाकार काम किया।

सुनील दत्त ने 1981 में फिल्म 'रॉकी' से बतौर हीरो बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म सफल रही और संजय रातोंरात स्टार बन गए। हालांकि, इसी दौरान उनकी मां नरगिस दत्त का निधन हो गया, जिसने उन्हें मानसिक रूप से गहरा झटका दिया। सफलता के बीच संजय दत्त नशे की लत का शिकार हो गए। उन्होंने कई इंटरव्यू में स्वीकार किया कि वह ड्रग्स के इतने आदी हो चुके थे कि उन्हें अपनी जिंदगी की भी परवाह नहीं रही थी।

2 दिन तक बेहोश पड़े रहे संजय दत्त

संजय दत्त एक बार लगातार दो दिनों तक बेहोशी जैसी हालत में सोते रहे। जब उनकी आंख खुली और उन्होंने खाना मांगा, तो घर का नौकर उन्हें देखकर रो पड़ा। संजय ने जब रोने की वजह पूछी तो नौकर ने बताया कि घर के सभी लोग डर गए थे और उन्हें लगा था कि कहीं उनकी मौत न हो गई हो। यही वह पल था जिसने संजय दत्त को अंदर तक झकझोर दिया। उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि अगर उन्होंने खुद को नहीं संभाला तो उनकी जिंदगी खत्म हो सकती है।

पिता के सहारे बदली जिंदगी

इस घटना के बाद संजय दत्त ने अपने पिता सुनील दत्त से मदद मांगी। परिवार ने उनका पूरा साथ दिया और इलाज के लिए उन्हें रिहैब भेजा गया। लंबे इलाज और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने नशे की लत से छुटकारा पाया और एक नई शुरुआत की। नशे से बाहर आने के बाद संजय दत्त ने अपने करियर में शानदार वापसी की। उन्होंने नाम, साजन, सड़क, खलनायक, वास्तव और मिशन कश्मीर जैसी फिल्मों से खुद को साबित किया।

संजय दत्त का दमदार करियर

साल 1999 में रिलीज हुई 'वास्तव: द रियलिटी' के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। इसके बाद 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' और 'लगे रहो मुन्ना भाई' ने उनकी छवि को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। हालांकि 1993 मुंबई बम धमाका मामले में कानूनी लड़ाई और जेल की सजा ने उनकी जिंदगी में एक और कठिन अध्याय जोड़ा, लेकिन 2016 में सजा पूरी करने के बाद उन्होंने फिर से फिल्मों में सफल वापसी की।

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