

Sunil Dutt Death Anniversary Special Story: बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर सुनील दत्त सिर्फ एक शानदार कलाकार ही नहीं, बल्कि एक समाजसेवी के रूप में भी याद किए जाते हैं। 25 मई 2005 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा था, लेकिन उनकी यादें आज भी फैंस के दिलों में जिंदा हैं। फिल्मों, राजनीति और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले सुनील दत्त का जीवन संघर्षों और संघर्षों की मिसाल रहा है।
सुनील दत्त का असली नाम बलराज दत्त था। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने जिंदगी के कठिन दौर का सामना किया। जब वह सिर्फ पांच साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई और छोटी उम्र में ही जिम्मेदारियों का बोझ उनके कंधों पर आ गया। मुंबई में पढ़ाई के दौरान उन्होंने घर चलाने के लिए बस कंडक्टर तक की नौकरी की। यही संघर्ष आगे चलकर उनकी ताकत बना।
सुनील दत्त अपनी दमदार आवाज के लिए भी जाने जाते थे। कॉलेज के दिनों में थिएटर और प्ले में हिस्सा लेने के दौरान उनकी आवाज ने सबका ध्यान खींचा। एक कार्यक्रम में रेडियो के प्रोग्रामिंग हेड ने उनकी आवाज सुनी और उन्हें रेडियो जॉकी की नौकरी ऑफर कर दी। उस दौर में उन्हें 25 रुपये महीने की सैलरी मिलती थी, लेकिन यही नौकरी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। रेडियो में काम करते हुए उन्होंने कई बड़े सितारों के इंटरव्यू लिए। इसी दौरान उनकी मुलाकात अभिनेत्री नरगिस से हुई, जो बाद में उनकी जीवनसंगिनी बनीं।
रेडियो के काम के सिलसिले में अक्सर उनका फिल्मी दुनिया से संपर्क होता रहता था। एक दिन एक्टर दिलीप कुमार का इंटरव्यू लेने पहुंचे सुनील दत्त पर निर्देशक रमेश सहगल की नजर पड़ी। उनकी पर्सनैलिटी और आवाज से प्रभावित होकर निर्देशक ने उन्हें फिल्मों में आने का सुझाव दिया। इसके बाद साल 1955 में फिल्म ‘रेलवे प्लेटफॉर्म’ से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। हालांकि उन्हें असली पहचान फिल्म मदर इंडिया से मिली। इस फिल्म में उन्होंने नरगिस के बेटे का किरदार निभाया था।
फिल्म इंडस्ट्री में पहले से एक्टर बलराज साहनी मशहूर थे। ऐसे में कन्फ्यूजन से बचने के लिए निर्देशक रमेश सहगल ने बलराज दत्त का नाम बदलकर सुनील दत्त रख दिया। यही नाम आगे चलकर भारतीय सिनेमा का बड़ा सितारा बन गया। फिल्मों में सफलता हासिल करने के बाद सुनील दत्त ने राजनीति में भी कदम रखा। वह कई बार सांसद चुने गए और लोगों की सेवा में हमेशा आगे रहे। अपने 48 साल लंबे करियर में उन्होंने कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते।