

Samantha Ruth Prabhu Reaction: साउथ सिनेमा की फेमस एक्ट्रेस सामंथा रुथ प्रभु इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। एक तरफ जहां बॉक्स ऑफिस पर उनकी नई फिल्म 'मां इंटि बंगारम' शानदार कमाई कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उनके व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़ी चर्चाओं ने भी सोशल मीडिया का पारा गरमा दिया है।
हाल ही में हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामंथा ने रिश्तों और आत्मनिर्भरता को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं, जिसने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। वहीं फैंस का मानना है कि सामंथा का यह बयान सीधे तौर पर उनके पहले पति की मौजूदा पत्नी शोभिता धूलिपाला के पुराने दावों का करारा जवाब है।
हाल ही में रिलीज फिल्म मां इंटि बंगारम की सफलता के बाद आयोजित की गई एक प्रेसवार्ता में सामंथा काफी खुश नजर आ रही थीं। इस दौरान जब मीडिया कर्मियों ने उनसे उनके जीवन के अनुभवों और रिश्तों को निभाने के तौर-तरीकों पर सवाल पूछा, तो सामंथा ने बहुत ही संजीदगी से अपनी बात रखी।
अभिनेत्री सामंथा ने बिना किसी का नाम लिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की एक बड़ी सलाह दे डाली। उन्होंने कहा कि इंसान का करियर और उसके रिश्ते काफी हद तक उसके खुद के फैसलों पर निर्भर करते हैं, लेकिन कभी-कभी परिस्थितियां हाथ से निकल जाती हैं क्योंकि किसी भी रिश्ते को चलाने के लिए दो लोगों की बराबर भागीदारी जरूरी होती है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सामंथा ने महिलाओं के स्वाभिमान और खुद पर भरोसे को सबसे ज्यादा अहमियत दी। उनका कहना था कि एक महिला को हमेशा खुद में ही पूर्ण महसूस करना चाहिए और किसी दूसरे के सहारे की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
सामंथा ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए किसी जीवनसाथी की तलाश कर रहा है कि वह आकर उसकी कमियों को पूरा करेगा, तो ऐसा रिश्ता कभी कामयाब नहीं हो सकता। सामंथा के अनुसार 'ऐसी सोच रखने से सामने वाले व्यक्ति से उम्मीदें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, जो आगे चलकर रिश्तों में दरार और बड़ी कड़वाहट की वजह बनती हैं।'
सामंथा रुथ प्रभु का यह बयान सोशल मीडिया पर आते ही इस कदर फैला की फैंस ने तुरंत इसका कनेक्शन शोभिता धूलिपाला से जोड़ दिया। दरअसल कुछ समय पहले नागा चैतन्य के साथ अपनी शादी के वक्त शोभिता ने एक इंटरव्यू में इसके बिल्कुल विपरीत सोच शेयर की थी।
शोभिता धुलिपाला ने तब कहा था कि 'इंसान हमेशा अधूरा होता है और कोई दूसरा शख्स ही आकर उसकी उस कमी को पूरा करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा था कि नागा चैतन्य की गैर-मौजूदगी में वह खुद को कभी पूरा नहीं मान सकतीं। अब जब सामंथा रुथ प्रभु ने खुद में मुकम्मल होने की वकालत की, तो लोगों को लगा कि यह शोभिता की उसी पुरानी बात पर एक सीधा निशाना है।'