

मुंबई: सैफ अली खान पर हुए हमले के मामले में अभी जांच पूरी नहीं हुई, लेकिन उससे पहले ही बीमा कंपनी ने लाखों का क्लेम पास कर दिया। अब ये मामला सवालों के घेरे में आ गया है। एएमसी (AMC) यानी एसोसिएशन आफ मेडिकल कंसल्टेंट्स ने आईआरडीएआई (IRDAI) यानी भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण से सवाल पूछा है कि बिना मामले की जांच पूरी हुई एक्टर का हॉस्पिटल का क्लेम आसानी से कैसे पास हो गया? ऐसे में यह कहा जा सकता है कि यह मामला बीमा कंपनी की हालत की हड्डी बन सकता है।
सोशल मीडिया पर आम जनता लगातार इस विषय पर चर्चा कर रही है कि सैफ अली खान के मामले में बहुत आसानी से और बहुत जल्दी क्लेम पास कर दिया गया। जबकि आम जनता के साथ ऐसा नहीं होता उन लोगों को क्लेम पास होने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। लोग इसे भेदभाव का मामला बता रहे हैं। ऐसे में अब यह देखना होगा कि आईआरडीएआई इस मामले पर क्या सफाई देती है। क्योंकि एएमसी ने आईआरडीएआई से सवाल पूछा है और अब आईआरडीएआई बीमा कंपनी से सवाल पूछ सकती है।
एएमसी द्वारा लिखे गए लेटर में इसे मेडिकल इंश्योरेंस इंडस्ट्री में भेदभाव का उदाहरण बताया गया है। लेटर में यह बात कही गई है कि हाई प्रोफाइल लोगों और कॉर्पोरेट पॉलिसी होल्डर को अक्सर बड़ी रकम का क्लेम आसानी से मिल जाता है। लेकिन आम जनता इसी तरह का क्लेम पाने के लिए लंबा इंतजार करती है। आखिर ऐसा क्यों होता है। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा था जिसमें बताया गया था कि सैफ अली खान के अस्पताल का बिल 36 लाख के आसपास आया है। जिसमें से 24 लाख का क्लेम तुरंत पास हो गया और इसी को लेकर सोशल मीडिया पर आम लोगों के बीच नाराजगी देखी जा रही है और इस पर लोग तेजी से बहस कर रहे हैं।