Rekha Bhardwaj Birthday: रेडियो से शुरू हुआ सफर, विशाल भारद्वाज ने बदली किस्मत, नमक इश्क का ने बना दिया स्टार

Rekha Bhardwaj Career: रेखा भारद्वाज 24 जनवरी को अपना 62वां जन्मदिन मना रही हैं। रेडियो से शुरू हुआ उनका संगीत सफर शास्त्रीय प्रशिक्षण और विशाल भारद्वाज के साथ साझेदारी से नई दिशा में बढ़ा।
rekha bhardwaj birthday radio to bollywood namak ishq ka
रेखा भारद्वाज (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Rekha Bhardwaj Birthday Special Story: प्लेबैक सिंगर रेखा भारद्वाज हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा आवाज़ों में से हैं, जिनकी गायकी सीधे दिल तक पहुंचती है। ‘नमक इश्क का’, ‘घाघरा’, ‘कबीरा’, ‘लक्कड़’ और ‘फिर ले आया दिल’ जैसे गीतों से उन्होंने प्यार, पीड़ा और जुनून हर भावना को आवाज दी है। 24 जनवरी को रेखा भारद्वाज अपना 62वां जन्मदिन मना रही हैं और इस खास मौके पर उनकी ज़िंदगी और करियर से जुड़ी कई दिलचस्प बातें सामने आई हैं।

रेखा भारद्वाज का बचपन ही संगीत के सुरों में डूबा रहा। उनके पिता को संगीत से बेहद लगाव था, हालांकि सामाजिक सोच के चलते उन्हें खुद संगीत सीखने का मौका नहीं मिला। इसी अधूरे सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने बच्चों को संगीत की शिक्षा देने का फैसला किया। रेखा महज़ तीन साल की उम्र में गाने लगी थीं। उनके घर में सुबह से शाम तक रेडियो बजता रहता था, जिससे उन्हें सुरों से प्यार हो गया। भले ही उस उम्र में वे संगीत को समझ नहीं पाती थीं, लेकिन उसकी अनुभूति उन्हें भीतर तक छू जाती थी।

रेखा भारद्वाज ने शास्त्रीय संगीत की ली ट्रेनिंग

रेखा ने 12 साल की उम्र में शास्त्रीय संगीत की औपचारिक ट्रेनिंग शुरू की। ठुमरी, दादरा और शास्त्रीय गायन ने उनकी आवाज़ को गहराई दी। करीब आठ साल के कड़े रियाज़ के बाद उन्हें एहसास हुआ कि ग़ज़ल और सूफी संगीत ही उनकी आत्मा की सच्ची अभिव्यक्ति हैं। यही वजह है कि वे अक्सर मज़ाकिया लहज़े में कहती हैं कि पिछले जन्म में मेरा दिल टूटा हुआ रहा होगा।

विशाल भारद्वाज ने बदली जिंदगी की दिशा

कॉलेज के दिनों में रेखा समारोहों और कार्यक्रमों में गजलें गाकर सबका दिल जीत लेती थीं। साल 1984 में कॉलेज के दौरान उनकी मुलाकात विशाल भारद्वाज से हुई, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। यह रिश्ता आगे चलकर निजी और पेशेवर साझेदारी में बदला और दोनों ने 1991 में शादी कर ली। हालांकि रेखा भारद्वाज का फिल्मी सफर आसान नहीं रहा। उनकी अलग और गहरी आवाज़ के चलते उन्हें कई बार रिजेक्शन झेलना पड़ा।

नमक इश्क का से मिली पहचान

रेखा ने कभी नहीं सोचा था कि वे बॉलीवुड की प्लेबैक सिंगर बनेंगी। साल 2002 में विशाल भारद्वाज ने गुलजार के लिखे एल्बम सॉन्ग ‘इश्का इश्का’ के जरिए उन्हें एक मंच दिया। इसके बाद उन्होंने ‘चाची 420’, ‘गॉडमदर’ जैसी फिल्मों में गाया। लेकिन असली पहचान मिली ‘ओमकारा’ के गीत ‘नमक इश्क का’ से, जिसने रेखा भारद्वाज को इंडस्ट्री की सबसे खास आवाज़ों में शामिल कर दिया।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com