एक टिकट काटने वाले लड़के ने बनाया टीवी का इतिहास, जानें रामानंद सागर की अनसुनी दास्तां

Ramanand Sagar Struggle: रामानंद सागर ने संघर्षों से भरी जिंदगी की शुरुआत मुंबई में पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में की। सिनेमा में उनकी यात्रा क्लैपर बॉय से शुरू हुई।
Ramanand Sagar, a ticket-cutting boy, created TV history
रामानंद सागर की अनसुनी दास्तां
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Ramanand Sagar Death Anniversary: भारतीय टेलीविजन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से रामानंद सागर का नाम दर्ज है। ‘रामायण’ के अप्रतिम निर्माण ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया, लेकिन इस महान निर्देशक की सफलता उनके शुरुआती संघर्षों से निकली हुई एक लंबी यात्रा का परिणाम थी। मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने कई मुश्किलें झेलीं, लेकिन कभी हार नहीं मानी।

मुंबई में अपने शुरुआती दिनों में रामानंद सागर ने पृथ्वी थिएटर में पृथ्वीराज कपूर के साथ बतौर असिस्टेंट स्टेज मैनेजर काम शुरू किया। थिएटर ही वह जगह थी, जहां उनकी क्रिएटिविटी प्रतिभा को दिशा मिली। पृथ्वीराज कपूर के मार्गदर्शन में उन्होंने कई नाटकों का निर्देशन किया, जिससे उनकी कहानी कहने और मंचन की कला और निखरती गई। यही थिएटर का अनुभव आगे चलकर उन्हें टेलीविजन पर महागाथाएं रचने की क्षमता देने वाला साबित हुआ।

रामानंद सागर का करियर

सिनेमा में उनका प्रवेश भी संघर्षों से भरा था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत क्लैपर बॉय के तौर पर साइलेंट फिल्म ‘राइडर्स ऑफ द रेल’ में काम करके की, एक ऐसा काम जिसे फिल्म निर्माण का सबसे छोटा और शुरुआती पद माना जाता है। लेकिन वहीं से उन्होंने फिल्मों की बारीकियों को सीखना शुरू किया। रामानंद सागर की लेखक क्षमता पहली बार तब चर्चाओं में आई जब उन्होंने राज कपूर की सुपरहिट फिल्म ‘बरसात’ की कहानी लिखी। यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और सिनेमा इंडस्ट्री में उनकी जगह मजबूत हुई।

रामानंद सागर का प्रोडक्शन कंपनी

साल 1950 में उन्होंने अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी सागर फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसे बाद में सागर आर्ट्स के नाम से जाना गया, की स्थापना की। इस कंपनी ने न सिर्फ फिल्मों, बल्कि टेलीविजन की दुनिया में भी कई ऐतिहासिक काम किए। निर्देशक के तौर पर भी रामानंद सागर ने लगातार सफलता हासिल की। धर्मेंद्र और माला सिन्हा स्टारर उनकी फिल्म ‘आंखें’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई। यह फिल्म इतनी ज्यादा लोकप्रिय हुई कि इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट डायरेक्टर अवॉर्ड भी मिला।

रामानंद सागर की बड़ी उपलब्धि

यह उन दिनों की बड़ी उपलब्धि थी, जिसने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के प्रमुख निर्देशकों में शामिल कर दिया। फिल्मों में सफल होने के बाद भी रामानंद सागर ने टीवी की तरफ रुख किया और 1987 में उनकी बनाई महागाथा ‘रामायण’ ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया। यह शो उस समय भीड़ को टीवी सेट के सामने खड़ा कर देता था, और आज भी इसे भारतीय टीवी का सबसे प्रतिष्ठित शो माना जाता है।

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