प्रधानमंत्री मोदी कल करेंगे ‘जहान-ए-खुसरो’ का उद्घाटन, जमेगा सूफी संगीत का रंग, रूमी, खुसरो और बुल्ले शाह किए जाएंगे याद
प्रधानमंत्री मोदी कल यानी शुक्रवार 28 फरवरी की शाम को राजधानी स्थित सुंदर नर्सरी में सूफी संगीत समारोह ‘जहान-ए-खुसरो' के रजत जयंती कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।
- Written By: राहुल गोस्वामी
PM मोदी कल करेंगे ‘जहान-ए-खुसरो' का उद्घाटन
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी कल यानी शुक्रवार 28 फरवरी की शाम को राजधानी स्थित सुंदर नर्सरी में सूफी संगीत समारोह ‘जहान-ए-खुसरो’ के रजत जयंती कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इस बाबत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)ने आज एक बयान में यह जानकारी दी। पीएमओ ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 फरवरी को शाम लगभग 7:30 बजे सुंदर नर्सरी, नई दिल्ली में भव्य सूफी संगीत समारोह, जहान-ए-खुसरो 2025 में भाग लेंगे।”
इसका साथ ही PMO ने कहा कि, प्रधानमंत्री मोदी देश की विविध कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रबल समर्थक रहे हैं और इसके अनुरूप, वह जहान-ए-खुसरो में भाग लेंगे जो सूफी संगीत, कविता और नृत्य को समर्पित एक अंतरराष्ट्रीय महोत्सव है।
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बयान में कहा गया कि यह आयोजन अमीर खुसरो की विरासत का जश्न मनाने के लिए दुनिया भर के कलाकारों को एक साथ ला रहा है। वर्ष 2001 में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और कलाकार मुजफ्फर अली द्वारा शुरू किए गए इस महोत्सव का आयोजन रूमी फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है। इस महोत्सव का आयोजन 28 फरवरी से 2 मार्च तक होना है। महोत्सव के दौरान, प्रधानमंत्री तेह बाजार (टीईएच- द एक्सप्लोरेशन ऑफ द हैंडमेड) का भी दौरा करेंगे, जिसमें एक जिला-एक उत्पाद शिल्प और देश भर से अन्य विभिन्न उत्तम कलाकृतियां, हस्तशिल्प और हथकरघा पर लघु फिल्में शामिल होंगी।
जानकारी दें कि, बीते 23 फरवरी को ‘जहान-ए-खुसरो’ के संस्थापक और फिल्मकार मुजफ्फर अली ने बताया था कि प्रधानमंत्री आगामी 28 फरवरी को दिल्ली स्थित सुंदर नर्सरी में आयोजित होने वाले सूफी संगीत समारोह की रजत जयंती कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। उन्होंने कहा था कि, ”यह रजत जयंती संस्करण सूफी परम्पराओं के शाश्वत ज्ञान को फिर से खोजने और उस सद्भाव का जश्न मनाने का एक मौका है, जो हम सभी को एकता के सूत्र में बांधता है। दिल्ली में इस सूफी संगीत समारोह की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री की उपस्थिति भारत की महान आध्यात्मिक समग्रता का प्रमाण है।”
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वहीं फिल्मकार अली ने कहा था कि ‘जहान-ए-खुसरो’ कार्यक्रम के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री की उपस्थिति उनके विकास और विरासत संबंधी दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह मेल खाती है। अली ने कहा था कि ‘जहान-ए-खुसरो’ पिछले 25 वर्षों से यह एक ऐसा केन्द्र रहा है जहां संगीत, कविता और भक्ति का संगम होता है और “हमें याद दिलाता है कि प्रेम ही एकता का अंतिम मार्ग है।”
उन्होंने यह भी कहा था कि साल 2000 में अपनी स्थापना के बाद से ‘जहान-ए-खुसरो’ एक अग्रणी अभियान रहा है, जिसने भौगोलिक और सांस्कृतिक सीमाओं को पाट दिया है। फिल्मकार ने कहा था कि अपने इस सफर में यह मुहिम रूमी, अमीर खुसरो, बाबा बुल्ले शाह, लल्लेश्वरी आदि की रहस्यमय परंपराओं को एक साथ लायी है। उनके मुताबिक, रूमी फाउंडेशन के तत्वावधान में ‘जहान-ए-खुसरो’ भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के दृष्टिकोण का प्रतीक बना हुआ है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
