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गोलू देवता की लोककथा पर बनेगी फिल्म 'बाला गोरिया'?
कौन हैं गोलू देवता, जिन्हें कुमाऊं में न्याय का देवता मानते हैं?
सात रानियों ने नदी में बहाया था शिशु, ऐसे बने गोलू देवता
Bala Goriya Film Golu Devta: बाबा नीम करौली के जीवन पर आधारित फिल्म हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर गदर मचा दिया है। इस फिल्म के सक्सेसफुल होने के बाद से लगातार धार्मिक आस्था और भारतीय लोककथाओं पर आधारित फिल्म बनाने की होड़ सी लग गई है।
बताया जा रहा है के हनुमान अंश की सफलता को देखने के बाद कुमाऊं क्षेत्र के प्रसिद्ध गोलू देवता की कहानी पर आधारित फिल्म भी जल्द ही बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली है। फिल्म का नाम बाला गोरिया हो सकता है, जिन्हें गोलू देवता के रुप में भी जाना जाता है।
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के लोकदेवता गोलू देवता को न्याय के देवता के रुप में पूजा जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गोलू देवता के दरबार में लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें चिट्ठियों में लिखकर अर्पित करते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में घंटियां चढ़ाकर आभार जताते हैं।
बाला गोरिया फिल्म की कहानी गोलू देवता जिन्हें गोल्ज्यू महाराज और न्याय के देवता के नाम से भी जाना जाता है, उनपर आधारित होगी। उत्तराखंड की लोककथाओं के अनुसार, चम्पावत के सूर्यवंशी राजा झाल राई की सात रानियाँ थीं, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। जब उनकी आठवीं शादी कलिंगा नामक राजकुमारी से होती है, तो वो कुछ समय बाद ही गर्भवती हो जाती है। ऐसे में जलन के चलते बाकी सातों रानियां जन्म के बाद शिशु को हटाकर उसकी जगह ओखली रख देती है और राजा से कहती है कि रानी ने पत्थर को जन्म दिया। वो सारी रानियां चालाकी से बच्चे को नदी में बहा देती है, लेकिन वो एक मछुआरे के जाल में फंस जाता है। जिसके बाद वो मछुआरा उसका पालन-पोषण करता है।
दरअसल बड़े होने के बाद गोलू को सारी सच्चाई का आभास होता है और वो सातों रानियों का पर्दाफाश करता है। जिसके बाद बड़े होकर गोलू देवता कुमाऊं के राजा बने। वे अपने घोड़े पर सवार होकर गाँव-गाँव जाते थे और गरीब, बेसहारा लोगों को तुरंत न्याय दिलाते थे। उनके दरबार से कोई भी निराश नहीं लौटता था। इसीलिए उन्हें न्याय का देवता भी कहा जाता है।