ऋषभ शेट्टी ने 'सूजे पैर' के साथ शूट किया था कांतारा चैप्टर 1 का रिकॉर्ड तोड़ क्लाइमेक्स

Rishab Shetty: 'कांतारा चैप्टर 1' के क्लाइमेक्स की शूटिंग ऋषभ शेट्टी ने सूजे हुए पैर और थके शरीर से की थी। अभिनेता ने फोटो शेयर कर खुलासा किया। फिल्म की स्क्रिप्ट को 15-16 बार लिखा गया था।
ऋषभ शेट्टी ने 'सूजे पैर' के साथ शूट किया था कांतारा चैप्टर 1 का रिकॉर्ड तोड़ क्लाइमेक्स
'कांतारा चैप्टर 1' के क्लाइमेक्स का सच: ऋषभ शेट्टी ने 'सूजे हुए पैर' और थके शरीर के साथ की थी शूटिंग
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Kantara Chapter 1: ऋषभ शेट्टी द्वारा निर्देशित और अभिनीत फिल्म 'कांतारा: चैप्टर 1' ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ दिए और दर्शकों को अपने शानदार क्लाइमेक्स से मंत्रमुग्ध कर दिया। जहां दर्शकों ने ऋषभ शेट्टी के दमदार अभिनय की सराहना की, वहीं कम ही लोग जानते हैं कि इस क्लाइमेक्स को पर्दे पर उतारने के लिए अभिनेता ने कितनी शारीरिक कठिनाइयाँ झेली थीं।

सोमवार को, ऋषभ शेट्टी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर साझा कर पर्दे के पीछे की दर्द भरी कहानी बताई। इस तस्वीर में उनका पैर सूजा हुआ दिखाई दे रहा था। उन्होंने खुलासा किया कि फिल्म के क्लाइमेक्स सीन की शूटिंग उन्होंने इसी हालत में की थी।

'सूजा हुआ पैर, थका हुआ शरीर'

अपने पोस्ट में ऋषभ ने लिखा, "यह क्लाइमेक्स शूट के समय की बात है। सूजा हुआ पैर, थका हुआ शरीर... लेकिन आज वही क्लाइमेक्स लाखों लोगों को पसंद आ रहा है। यह सब उस दिव्य ऊर्जा की कृपा से संभव हुआ, जिस पर हम विश्वास करते हैं। सभी का दिल से धन्यवाद, जिन्होंने हमारा साथ दिया।" उनका यह खुलासा बताता है कि फिल्म की सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण छिपा है।

15-16 बार लिखी गई पटकथा

सिर्फ क्लाइमेक्स ही नहीं, फिल्म की पटकथा को अंतिम रूप देने में भी भारी प्रयास लगा था। ऋषभ ने आईएएनएस को बताया कि इस प्रीक्वल की कहानी और हर पहलू को बिल्कुल सही करने के लिए, उन्हें स्क्रिप्ट को करीब 15-16 बार फिर से लिखना पड़ा। उन्होंने कहा, "पहले मैंने सोचा था 7-8 ड्राफ्ट होंगे, लेकिन असल में 15-16 बार हमें कहानी फिर से लिखनी पड़ी। हर बार नई नरेशन बनती रही, इसलिए ये सब नरेशन ड्राफ्ट थे।"

प्रीक्वल की कहानी बदलने का फैसला

ऋषभ ने आगे बताया कि प्रीक्वल की कहानी पहले अलग थी। उन्होंने शुरुआत में शिवा के पिता की कहानी पर काम शुरू किया था, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि पहली फिल्म को एक ठोस पृष्ठभूमि देने के लिए कहानी को और पीछे ले जाना होगा। उन्होंने कहा, "जब हमने प्रीक्वल पर काम शुरू किया, तो हमने शिवा के पिता की कहानी से शुरुआत की... स्क्रिप्ट तैयार भी हो गई, पर बाद में लगा कि पहली फिल्म को एक ठोस पृष्ठभूमि चाहिए। तब हमने सोचा—चलो थोड़ा पीछे लौटते हैं, इसे शुरुआत की कहानी बनाते हैं, कोई दंतकथा नहीं।” इस विस्तृत बैकस्टोरी को बताने के लिए ही उन्हें बार-बार स्क्रिप्ट पर काम करना पड़ा।

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