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गुरु दत्त और वहीदा रहमान की लव स्टोरी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे चर्चित लव स्टोरी में से एक है।
शादीशुदा होते हुए भी गुरुदत्त को वहीदा रहमान से प्यार हो गया था, लेकिन अलग धर्म के कारण ये कहानी अधूरी रह गई।
गुरु दत्त ने अपना आखिरी समय अकेले में बिताया था।
Guru Dutt Waheeda Rehman Love Story: साल 1956 में फिल्म सी.आई.डी से वहीदा रहमान के करियर की सबसे पहली फिल्म थी। इस फिल्म में उनकी जोड़ी लेजेंड एक्टर गुरु दत्त के साथ बनी
थी। हालांकि इस फिल्म के बाद भी दोनों ने कई फिल्में साथ की थी, जिसमें प्यासा, कागज के फूल और साहब बीबी और गुलाम जैसी सुपरहिट फिल्में भी शामिल हैं।
गुरु दत्त और वहीदा रहमान की जोड़ी का पर्दे का प्यार असल जिंदगी में भी परवान चढ़ने लगा था। बताया जाता है कि गुरु दत्त को तो पहली नजर में ही वहीदा रहमान से प्यार हो गया था। हालांकि जब वो वहीदा से मिले थे, तब उनकी शादी पहले से ही हो चुकी थी। मशहूर फीमेल सिंगर और एक्ट्रेस गीता दत्त गुरु दत्त की पत्नी थी।
जब गुरु दत्त की जिंदगी में वहीदा रहमान की एंट्री हुई थी, उस समय भी गीता और गुरु दत्त की शादीशुदा जीवन सामान्य ही था। लेकिन जैसे ही गुरु दत्त की पत्नी गीता को इस बात की भनक पड़ी, तब वो काफी गुस्से में थी। इस बात की खबर कानों में पड़ते ही गीता से गुरु से खूब लड़ाई की थी, उन्होंने गुरु दत्त के सामने उनमें से या वहीदा में से किसी एक को चुनने की शर्त रख दी थी। जिसके बाद गुरु दत्त ने वहीदा को चुना। यही से गीता दत्त ने गुरु दत्त का घर छोड़ दिया और कभी पीछे पलटकर उनकी ओर नहीं देखा।
गुरु दत्त और वहीदा रहमान की जोड़ी को दर्शकों के द्वारा भी काफी पसंद किया जाता था। दोनों की जोड़ी ने कई फिल्मों में साथ काम किया था। गुरु दत्त और वहीदा रहमान ने फिल्म चौदहवी का चांद, प्यासा, कागज के फूल और साहब बीबी और गुलाम जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया था। हालांकि साथ काम करने के बाद भी दोनों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
गुरु दत्त का पूरा परिवार उनके इस रिश्ते के खिलाफ था। वहीदा रहमान का मुस्लिम धर्म इसका सबसे बड़ा कारण था। परिवार वालों की सख्ती के बाद से ही गुरु दत्त ने वहीदा से दूरियां बना ली थी। वहीदा से दूरी के गम को भूलाने के लिए गुरु दत्त ने शराब का सहारा लिया। वो पूरी तरह नशे में डूबते चले गए।
वहीदा से दूर होने के बाद गुरु दत्त अपने बच्चों से मिलने के लिए तड़प रहे थे, लेकिन गीता दत्त की नाराजगी के चलते वो अपने बच्चों से नहीं मिल पाते थे। आपको बता दें कि गुरु दत्त अपनी बेटी से बहुत प्यार करते थे। अकेलेपन में वो सिर्फ अपनी बेटी को याद करते थे। बताया जाता है कि अपने जीवन के आखिरी समय में गुरु दत्त अकेले थे। उन्होंने अपने परिवार से दूर रहकर ही अकेले में आखिरी सांस ली थी। 10 अक्टूबर 1964 को गुरु दत्त की मौत हो गई थी। हालांकि उनकी मौत का कारण आज भी एक अनसुलझा रहस्य है।