'हिजबुल की लंका में जिसने लगाई आग', मेजर मोहित शर्मा के जीवन पर आधारित है धुरंधर फिल्म

Major Mohit Sharma: फिल्म 'धुरंधर' शहीद मेजर मोहित शर्मा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने 'इफ्तिखार भट्ट' बनकर हिजबुल मुजाहिदीन में घुसपैठ की और 2009 में सर्वोच्च बलिदान दिया।
'हिजबुल के लंका जिसने लगाई आग', मेजर मोहित शर्मा के जीवन पर आधारित है धुरंधर फिल्म
मेजर मोहित शर्मा की वीरगाथा पर आधारित है 'धुरंधर', जिन्होंने 'इफ्तिखार भट्ट' बनकर हिजबुल का किया था खात्मा
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Major Mohit Sharma Dhurandhar Film: बॉलीवुड फिल्म 'धुरंधर' की खूब चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि यह फिल्म भारतीय सेना के एक शहीद मेजर के अदम्‍य साहस और सर्वोच्‍च बलिदान की रियल लाइफ स्‍टोरी पर आधारित है। यह कहानी है भारतीय सेना के इलीट 1 पैरा (स्पेशल फोर्स) के अधिकारी मेजर मोहित शर्मा की, जिन्होंने फर्जी नाम से आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में घुसपैठ कर उनकी कमर तोड़ दी थी और बाद में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

मेजर मोहित शर्मा की सैन्‍य कुशलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे 2009 में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। इस ऑपरेशन में उन्होंने न केवल अपने साथियों को सुरक्षित किया, बल्कि 4 आतंकियों को भी ढेर किया था।

इफ्तिखार भट्ट बनकर हिजबुल में घुसपैठ

रोहतक (हरियाणा) में जन्मे मेजर मोहित शर्मा एनडीए और आईएमए से ग्रैजुएट थे। अत्यधिक साहस, निडरता और नेतृत्व क्षमता के लिए वे जाने जाते थे। उनका सबसे बड़ा और गोपनीय ऑपरेशन 2004 में दक्षिण कश्मीर के शोपियां में हुआ था, जब उन्होंने हिजबुल मुजाहिदीन में घुसपैठ करने के लिए 'इफ्तिखार भट्ट' नाम अपनाया।

रणनीति: उन्होंने लंबी दाढ़ी और बाल रखे और आतंकियों को यह कहानी सुनाई कि उनके भाई की मौत सेना के हाथों हुई है और वह बदला लेना चाहते हैं।

परिणाम: आतंकियों ने उन पर विश्वास कर उन्हें अपने नेटवर्क का हिस्सा बना लिया। इस दौरान मेजर शर्मा ने उनके बेस, संपर्कों और ऑपरेशन के तौर-तरीकों की अहम जानकारी जुटाई। जब उनकी वास्तविक पहचान का अंदेशा हुआ, तो मुठभेड़ के दौरान उन्होंने हिजबुल के दो आतंकियों (अबू तोरारा और अबू सबज़ार) को मार गिराया।

2009 में शहादत और अशोक चक्र से सम्मान

मेजर मोहित शर्मा 2009 में उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एक और महत्वपूर्ण मिशन पर तैनात थे। इस अभियान में दुश्मनों के निशाने पर आने और गोली लगने के बावजूद वे लड़ते रहे और चार आतंकियों को मार गिराने में सफल रहे।

सर्वोच्च बलिदान: इसी ऑपरेशन के दौरान उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

सम्मान: उनकी अतुलनीय वीरता और अदम्य साहस के लिए 2009 में उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया, जो शांति काल में दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है।

बड़े पर्दे पर वीरगाथा, रणवीर सिंह की चर्चा

अगर फिल्म 'धुरंधर' में रणवीर सिंह की भूमिका की खबर सच साबित होती है, तो यह वास्तविक जीवन के इस नायक की अद्भुत दृढ़ संकल्प, त्याग और सर्वोच्च देशभक्ति की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाएगी। फिल्म से आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा जारी है, लेकिन शहीद योद्धा की यह वीरगाथा निश्चित रूप से दर्शकों और राष्ट्रीय सुरक्षा के जानकारों में जबरदस्त उत्साह भर रही है।

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